सतना। तीन माह से सरकारी राशन दुकानों से गेहूं-चावल-नमक का इंतजार करते ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार होली के दिन टूट गया। उचेहरा तहसील के धनेह और पिथौराबाद के परेशान ग्रामीणों ने होली दिन राशन की मांग करते हुए जल सत्याग्रह कर दिया। पानी में खड़े होकर अपने हक के राशन की मांग कर […]
सतना। तीन माह से सरकारी राशन दुकानों से गेहूं-चावल-नमक का इंतजार करते ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार होली के दिन टूट गया। उचेहरा तहसील के धनेह और पिथौराबाद के परेशान ग्रामीणों ने होली दिन राशन की मांग करते हुए जल सत्याग्रह कर दिया।
पानी में खड़े होकर अपने हक के राशन की मांग कर रहे गरीबों के अनशन की सूचना मिलने पर आनन फानन में अपर कलेक्टर शैलेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों को समझाइश देकर उनका अनशन समाप्त करवाया। उधर इस मामले में 3 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला उजागर करने वाले उचेहरा एसडीएम होली पर्व की छुट्टी के दिन भी धनिया गांव में ग्रामीणों के बीच पहुंच कर राशन नहीं मिलने संबंधी जांच कर रहे हैं और ग्रामीणों के बयान दर्ज कर रहे हैं। सत्ता पोषित राशन कारोबारियों पर अभी तक शिकायत के बाद भी अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है और राशन की कालाबाजारी करने वाले खुले घूम रहे हैं। ये इनका पहला वाकया नहीं है। इसके पहले भी इन लोगों राशन माफियाओं पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। लेकिन हाईकोर्ट की राहत पर इनका कारोबार फिर चल रहा है और खाद्य विभाग हाईकोर्ट में सख्ती से अपना पक्ष नहीं रख रहा है।
26 राशन दुकानों में नहीं बंटा 3 माह से राशन
उचेहरा तहसील की 26 राशन दुकानों में तीन माह से गरीबों को सरकारी खाद्यान्न का वितरण नहीं हुआ। ग्रामीण गुहार लगाते रहे लेकिन खाद्य विभाग के अफसर चुप्पी साधे बैठे रहे। होली के दिन धनेह और पिथौराबाद के ग्रामीण खाद्यान्न की मांग को लेकर पानी पर खड़े होकर अनशन शुरू कर दिए। इनका कहना था कि राशन माफिया से उनके हक का राशन दिलाया जाए। जिस राशन की कालाबाजारी की जा चुकी है उसे मंगाकर उन्हें दिलाया जाए और सभी दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए। मौके पर पहुंचे अपर कलेक्टर ने ग्रामीणों की बातें सुनी। आश्वस्त किया कि जल्द ही सभी को राशन दिया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद अनशन समाप्त हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि यहां राशन सप्लाई का जिम्मा रावेन्द्र सिंह के पास है। उसे भाजपा के बड़े नेता का वरदहस्त है, इसलिए न तो उस पर कोई कार्यवाही होती है और उसका मनमानी राज जारी है।
दिसंबर 2025 से राशन वितरण नहीं
उचेहरा तहसील की 26 राशन दुकानों में दिसंबर से खाद्यान्न नहीं मिल रहा है। परेशान गरीब खाद्य विभाग के अफसरों से गुहार लगाते रहे कि उन्हें गेहूं चावल का वितरण करवाया जाए। लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज बन कर रह गई। परेशान गरीबों ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की। इससे मामला एसडीएम उचेहरा सुमेश द्विवेदी के संज्ञान में आया। उन्होंने अपने अमले के साथ जांच की तो 3 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला सामने आया। इसके बाद संबंधित विक्रेताओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। इनकी राशन दुकानें हटाकर निकटवर्ती राशन दुकानों से संलग्न कर दी गई हैं। इसके साथ ही उचेहरा थाने को एफआईआर दर्ज करने शिकायत भी दी गई है।
इतना राशन गायब कर दिया गया
दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच कई दुकानों में नियमित वितरण नहीं हुआ। हितग्राहियों ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। जांच में पाया गया कि स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर है। कुल मिलाकर 4897 क्विंटल गेहूं, 4132 क्विंटल चावल, 44 क्विंटल नमक और 28 क्विंटल शक्कर राशन दुकानों से गायब मिला।
राशन दुकानों में इतने का गायब मिला राशन
एसडीएम की जांच रिपोर्ट के मुताबिक परसमनिया की राशन दुकान में ₹20.95 लाख का राशन गायब मिला। पटीहट – ₹20.75 लाख, रामपुर पाठा – ₹15.23 लाख, गढ़ौत – ₹19.84 लाख, तिघरा – ₹7.16 लाख, बाबूपुर – ₹7.97 लाख, बरागढ़ोली – ₹1.70 लाख, पिथौराबाद – ₹13.72 लाख, पोड़ी – ₹27.51 लाख, पिपरीकला – ₹7.32 लाख, अटरा – ₹13.58 लाख, नंदहा – ₹8.83 लाख, तुषगवां – ₹21.38 लाख, धनेह – ₹12.88 लाख, मानिकपुर – ₹9.56 लाख, इटमा खोहरा – ₹7.09 लाख, पथरहटा – ₹9.09 लाख, नरहटी – ₹1.58 लाख, नरहटीरगला – ₹6.98 लाख, करहीकला – ₹4.84 लाख, पोड़ीगरादा – ₹2.81 लाख, करही खुर्द – ₹3.33 लाख, बांधी मौहार – ₹10.96 लाख, इचौल – ₹5.39 लाख, आलमपुर – ₹21.12 लाख और पिपरिया में – ₹19.99 लाख रुपये का खाद्यान्न गायब मिला। इन राशन दुकानों से गरीबों का खाद्यान्न खुर्द बुर्द कर दिया गया।
उपभोक्ता भंडार है बड़ा खेल
जानकारों का कहना है कि उचेहरा में राशन दुकानें ज्यादातर उपभोक्ता भंडार के रूप में संचालित है। इनके कर्ता धर्ता सतना में रहते हैं और यहीं से उनका संचालन करते हैं। इनके द्वारा हमेशा से राशन को बाजार में बेचा जाता है। सत्ताधारी दल के नेताओं के करीबी होने के कारण इनपर कार्यवाही भी नहीं होती है। नियमानुसार यहां समितियों को संचालन का जिम्मा दिया जाना चाहिए। लेकिन खाद्य विभाग इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा सका। यहां का राशन माफिया कितना सक्रिय है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन प्रभारी मंत्री धुर्वे ने गड़बड़ीपकड़ी थी फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके बाद तत्कालीन एसडीएम दिव्यांक सिंह IAS ने भी गड़बड़ी पकड़ी। एफआईआर दर्ज करवाई। लेकिन न्यायालय से स्टे लेकर फिर उसी राह पर कारोबार है। खाद्य विभाग न्यायालय में सही तरीके से पक्ष भी नहीं रख रहा है।