सीएम हेल्पलाइन में भी सबसे ज्यादा लंबित शिकायतें पीएचई कीटीएल बैठक की समीक्षा में सामने आई जानकारी
सतना। शिकायतों के मामले में अगर सतना जिले की छवि खराब होती है तो उसकी सबसे बड़ी वजह होगी पीएचई। सबसे ज्यादा शिकायतें पीएचई विभाग की हैं और इनके निराकरण की गति भी काफी धीमी है। हद तो यह है कि इनका हर बार एक ही जवाब होता है कि किसानों ने सिंचाई के लिए पानी ले लिया है इसलिए जलस्तर नीचे जाने से हैण्डपंप काम नहीं कर रहे। लेकिन हकीकत इससे जुदा है। अगर सतना के पड़ोसी जिलों को देखा जाए तो वहां भी कमोवेश वहीं स्थितियां है लेकिन वहां से ऐसी शिकायतें नहीं आती है। बहरहाल समय सीमा समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि समाधान आनलाइन कि जिले में कुल 2421 शिकायतें लंबित हैं जिसमें से पीएचई की सर्वाधिक 2272 शिकायतें शामिल हैं। यही स्थिति सीएम हेल्पलाइन में निकल कर सामने आईं। 10762 शिकायतों में सबसे ज्यादा 2883 शिकायतें पीएचई की लंबित है। इस स्थिति को देखते हुए टीएल प्रकरणों की समीक्षा कर रही निगमायुक्त तन्वी हुड्डा ने पीएचई के अधिकारी के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए शिकायतों का निराकरण तेजी से और गंभीरता के साथ करने के निर्देश दिए। इस दौरान जिपं सीईओ हरेन्द्र नारायण भी मौजूद रहे।
कलेक्टर की अनुपस्थिति में इस सोमवार को समय सीमा बैठक निगमायुक्त तन्वी हुड्डा ने ली। समाधान आनलाइन के प्रकरणों की समीक्षा में पाया कि जिले में विभिन्न विभागों की 2421 शिकायतें निराकरण के लिए लंबित हैं। इनमें से एल1 में 1393, एल2 में 357, एल3 में 375 व एल4 में 296 शिकायतें लंबित हैं। निगमायुक्त ने कहा कि इन शिकायतों को अगले समाधान तक निराकृत कर लिया जाए। इसी तरह से सीएम हेल्पलाइन में लंबित 10762 शिकायतों में पीएचई की 2883, राजस्व की 1117 और फूड की 1209 शिकायतें लंबित मिली। फूड विभाग की लंबित शिकायतों पर डीएसओ से पूछे जाने पर बताया कि पात्रता पर्ची की शिकायतें सर्वाधिक आ रही है। इसी तरह से स्वास्थ्य की 411 शिकायतों में बताया गया कि बजट न होने से जननी सुरक्षा जैसी योजनाओं का भुगतान लंबित है उसकी शिकायतें है। पाया गया कि एल1 में 5266, एल2 में 1162, एल3 में 1561 व एल4 में 2773 शिकायतें निराकरण के लिए लंबित है। बैठक में अपर कलेक्टर विमलेश सिंह, एसडीएम दिव्यांक सिंह, राजेश शाही, सुरेश अग्रवाल, धीरेन्द्र सिंह, पीएस त्रिपाठी, संस्कृति शर्मा, संयुक्त कलेक्टर साधना परस्ते सहित विभाग प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे।
सीएम हेल्पलाइन प्रभारी पर नाराजगी
समीक्षा में निगामयुक्त ने पाया कि प्राकृतिक आपदा और राहत के मामलों की मार्किंग आदिम जाति कल्याण विभाग में भेजी जा रही हैं। इस पर निगमायुक्त ने प्रभारी अधिकारी और ओएस से पूछा कि ये मामला तो राजस्व विभाग का है। सफाई में बताया गया कि ट्राइवल के आयोग से यह शिकायत आई थी लिहाजा उस विभाग को दी गई है वहां से संबंधित विभाग से जवाब लेकर भेजा जाता है। इस पर निगमायुक्त ने कहा कि जिस विभाग का मामला है उस विभाग को भेजा जाना चाहिए।
जब डीएसओ बताने लगे गलत महीना
बैठक में निगमायुक्त ने अन्य विभागों से समन्वय के मामले पूछे तो डीएसओ ने कहा कि 15 अगस्त को उपभोक्ता दिवस है। यह सुन निगमायुक्त सवालियां नजरों से डीएसओ को देखा तो फिर डीएसओ ने खुद को संभालते हुए कहा कि 15 मार्च को उपभोक्ता दिवस है। कलेक्टर के निर्देश हैं कि सभी विभाग के समन्वय से यह कार्यक्रम हो। इस पर निगमायुक्त ने सभी विभागों को इस पर सहयोग करने कहा लेकिन डीएसओ से कहा कि यह तो मूल रूप से आपका काम है जागरुकता के काम आप करिये।
ये रहे टॉप और डिफाल्टर
सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों के निराकरण के मामले में देवेन्द्र सिंह निरीक्षक टॉप में रहे। उनका निराकरण 97.22 फीसदी रहा। डिफाल्टर में त्रिभुवन सिंह डिप्टी रजिस्ट्रार 5.41 फीसदी, डब्लूआरडी के रामानंद सिंह 7.89 व भागवत प्रसाद द्विवेदी 24 फीसदी रहे।