सवाई माधोपुर

Gas Crisis: सवाईमाधोपुर में 26 दिन का नियम बना परेशानी, लोग महंगे दाम पर कोयला खरीदने को मजबूर

Sawai Madhopur Gas Crisis:गैस की कमी का असर होटल और ढाबा संचालकों पर भी पड़ा है। पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण कई संचालक अब वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कोयले का उपयोग कर रहे हैं।

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फाइल फोटो- पत्रिका

सवाईमाधोपुर। ईरान, इजराइल और अमरीका के बीच चल रहे युद्ध के कारण गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। हालांकि ईरान ने हार्मुज स्टेट के समुद्री मार्ग से भारतीय जहाजों को निकलने की अनुमति दी है, लेकिन हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। इसके चलते देश में घरेलू गैस की किल्लत बढ़ गई है।

एहतियातन सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर जारी करने के लिए 26 दिन का नियम लागू किया है। इस नियम से बड़े परिवारों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। जिला मुख्यालय पर कई परिवारों में आठ से दस से अधिक सदस्य हैं।

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ऐसे परिवारों में गैस सिलेंडर 26 दिन से पहले ही खत्म हो जाता है, लेकिन नई गाइडलाइन के कारण गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं को निर्धारित अवधि से पहले नया सिलेंडर उपलब्ध नहीं करा रही हैं। इससे आमजन को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

होटल और ढाबा संचालकों पर भी गैस की कमी का असर

गैस की कमी का असर होटल और ढाबा संचालकों पर भी पड़ा है। पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण कई संचालक अब वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कोयले का उपयोग कर रहे हैं। चूल्हे और सिगड़ी पर भोजन तैयार करने की मजबूरी ने उनकी लागत और श्रम दोनों बढ़ा दिए हैं।

बड़े परिवारों को घरेलू गैस की किल्लत

स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे परिवारों के लिए यह नियम परेशानी का कारण नहीं है, लेकिन बड़े परिवारों और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए यह स्थिति बेहद कठिन है। आमजन ने सरकार से गैस वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग की है।

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गैस सिलेण्डर की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से रसोई का बजट गड़बड़ा रहा है। खाना पकाने में भी परेशानी हो रही है। सरकार और प्रशासन को गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिशिचत करनी चाहिए।
-कशिश जादौन गृहणी।

गैस की किल्लत से खाना पकाने तक के लाले पड़ रहे हैं। चूल्हे और सिगड़ी का साहरा लेना पड़ रहा है। ऐसे में परेशानी हो रही है। सरकार और प्रशासन को वैकल्पिक प्रबंध करने चाहिए।
-नीतू जैन, गृहणी।

गैस की किल्लत से परेशानी हो रही है। कोयले की मांग बढ़ने से दाम बढ़ गए हैं। लेकिन मजबूरी में महंगे दामों पर कोयला लाना पड़ रहा है। ऐसे में आर्थिक भार पड़ रहा है।
-नीलम वर्मा, गृहणी।

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