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Govt Job fraud: राजस्थान में सरकारी नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी का खुलासा, मास्टरमाइंड अरेस्ट; युवाओं को ऐसे जाल में फंसाते

Fake Job Racket: पुलिस ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले शातिर गिरोह का पर्दाफाश कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया।

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Fake Job Racket Busted

Photo: AI generated

सवाईमाधोपुर। रवांजना डूंगर थाना पुलिस ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले शातिर गिरोह का पर्दाफाश कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया। थानाधिकारी दिलीप कुमार के नेतृत्व में सहायक उपनिरीक्षक भगवत सिंह मय टीम ने गत 18 मार्च को साइबर सैल व मुखबिर की सूचना पर दबिश दी।

इस दौरान आरोपी आनन्द सिरोहिया पुत्र बाबूलाल राजपूत निवासी गण्डाल थाना बामनवास हाल निवासी श्याम नगर जयपुर एवं किराए से अड गांव बुजर्ग जिला अकोला महाराष्ट्र को गिरफ्तार किया।

ऐसे दिया वारदात को अंजाम

आरोपी आनन्द सिरोहिया ने राजस्थान में गिरोह बनाकर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का प्रलोभन दिया। लैब टेक्नीशियन, रेडियोग्राफर, ईसीजी और आयुर्वेदिक नर्सिंग जैसी भर्तियों में फर्जी डिग्री तैयार कर उम्मीदवारों से 6 से 15 लाख रुपए तक वसूले जाते थे। गिरोह ने कई लोगों को नौकरी का झांसा देकर ठगी की।

बेरोजगार युवाओं को बनाते निशाना

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसका गिरोह सोशल मीडिया और जान-पहचान के जरिए बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते थे। वे खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताकर भरोसा जीतते और चयन प्रक्रिया में अंदरूनी सेटिंग का झांसा देते थे। गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेज और नियुक्ति पत्र तक तैयार कर लेते थे, जिससे पीड़ितों को लंबे समय तक धोखे में रखा जाता था।

गिरोह के अन्य लोगों को तलाश

पुलिस अब गिरोह के अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है और मामले में जुड़े संभावित बैंक खातों व लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सरकारी नौकरी के नाम पर किसी भी प्रकार के प्रलोभन या अवैध लेनदेन से बचें और ऐसे मामलों की तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि इस तरह की ठगी पर अंकुश लगाया जा सके।

यह था मामला

गत 19 जनवरी को परिवादी चन्द्रपाल पुत्र विश्राम गुर्जर निवासी गोज्यारी थाना मलारना डूंगर ने रिपोर्ट दी कि वर्ष 2020 में लेब टेक्नीशियन भर्ती के दौरान आरोपी ने सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर उससे 15 लाख रुपए मांगे। परिवादी ने 10 लाख रुपए आरोपी को दे दिए, लेकिन चयन नहीं हुआ। इस प्रकार आरोपी ने धोखाधड़ी कर सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी की। इस पर मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया।

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