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राजस्थान के इस शहर को Smart City बनाने का वादा, योजना में ये थे प्रस्तावित कार्य, जानें हकीकत

Sawai Madhopur Smart City : स्मार्ट सिटी का ख्वाब दिखाकर शहर को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की योजना केवल कागजों ही दौड़ रही है। आज भी शहर की गलियों में वही पुरानी बदहाली और धरोहरों की उपेक्षा साफ झलकती है।

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Sawai Madhopur Smart City

सवाईमाधोपुर शहर का दृश्य। फोटो पत्रिका

सवाईमाधोपुर। स्मार्ट सिटी का ख्वाब दिखाकर शहर को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की योजना केवल कागजों ही दौड़ रही है। आज भी शहर की गलियों में वही पुरानी बदहाली और धरोहरों की उपेक्षा साफ झलकती है। केन्द्र सरकार की योजना में शामिल होने के बावजूद सफाई व्यवस्था और विरासत संरक्षण पर प्रशासन व नगरपरिषद का कोई ध्यान नहीं है। करोड़ों रुपए का बजट तय हुआ, क्लीन एंड ग्रीन कॉन्सेप्ट लांच हुआ, लेकिन शहर की तस्वीर अब तक नहीं बदली। सवाईमाधोपुर की पहचान रणथंभौर किला, पुराने बाजार और बावड़ियों से है। इन्हें संजोने का वादा हुआ था, मगर हकीकत यह है कि धरोहरें उपेक्षा की मार झेल रही हैं।

स्मार्ट सिटी योजना में शामिल होने के बावजूद सवाईमाधोपुर का कायाकल्प अधूरा ही नजर आ रहा है। केन्द्र सरकार ने शहर को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने का सपना दिखाया था, लेकिन आज भी गलियों में कचरे के ढेर, नालों की बदहाल स्थिति और उपेक्षित धरोहरें इस सपने की पोल खोल रही हैं। जिला प्रशासन और नगरपरिषद का ध्यान सफाई और संरक्षण पर नहीं है।

विरासत संरक्षण अधूरा

योजना के तहत पुराने बाजारों और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने का वादा किया था ताकि शहर अपनी विरासत के साथ स्मार्ट बने। लेकिन रणथंभौर की पहचान रखने वाला यह जिला आज भी उपेक्षा का शिकार है। बावड़ियां, तालाब और पुराने धार्मिक स्थल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। विरासत संरक्षण के प्रयास धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे।

सफाई हो रही धूमिल

क्लीन एंड ग्रीन थीम पर पूरे शहर को तैयार किया जाना था। नए निर्माण पर कम खर्च प्रस्तावित था, जबकि सफाई, नालों की मरम्मत, कचरा निस्तारण प्लांट संचालन और ट्रांसफर स्टेशन पर ज्यादा खर्च होना था। शहर की विरासत और बाजारों का संरक्षण, धार्मिक कॉरिडोर बनाना और भूल-भुलैया जैसे मनोरंजन स्थल विकसित करना भी योजना का हिस्सा था। जिला स्तर पर संचालन जिला कलक्टर की अध्यक्षता में बनाई जाने वाली कमेटी से होना था।

प्रदेश के 14 जिलों का होना था कायाकल्प

सरकार ने पिछले साल स्मार्ट सिटी योजना की तर्ज पर क्लीन एंड ग्रीन सिटी कॉन्सेप्ट लांच किया था। इसके तहत अलवर, बूंदी, नाथद्वारा, खाटूश्यामजी, माउंट आबू, बालोतरा, भरतपुर, बीकानेर, सवाईमाधोपुर, जोधपुर, जैसलमेर, किशनगढ़, भीलवाड़ा और पुष्कर का विकास होना था। इसके लिए सरकार ने 900 करोड़ रुपए आवंटित किए। एक शहर के हिस्से में 64.28 करोड़ रुपए खर्च होने थे।

स्मार्ट सिटी योजना में ये थे प्रस्तावित कार्य

-सफाई के लिए मैनपावर बढ़ाना और बजट में 20 फीसदी वृद्धि।
-इंदौर, चंडीगढ़ की तर्ज पर सफाई मॉडल लागू करना।
-प्रमुख नालों का छोटे नालों से मिलान और ठोस कचरा प्रबंधन।
-कचरा निस्तारण प्लांट का संचालन बेहतर करना और सेग्रिगेशन संसाधनों में बढ़ोतरी।
-आबोहवा शुद्ध रखने के लिए नियमित पानी का छिड़काव, सड़क सफाई और वायु शुद्धता मापक यंत्र लगाना।
-वेडिंग जोन बनाना और सभी वेंडरों को जगह देना।
-पूरे शहर में सीवर लाइन और बारिश के पानी की निकासी के इंतजाम।
-रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण।
-शहर की सभी विरासत का संरक्षण और पुराने बाजारों को सहेजना।
-म्यूजिकल फाउंटेन, भूल-भुलैया और पार्कों का विकास।

इनका कहना है…

स्मार्ट सिटी योजना का कार्य उच्च स्तर से है। इसके लिए जल्द ही कार्यकारी एजेंसी नियुक्त की जाएगी। इसके बाद ही कार्य शुरू हो सकेगा।
गौरव मित्तल, आयुक्त, नगरपरिषद सवाईमाधोपुर।