गांवों में जन की आशा' बनी बनास: सूखते कुएं, बावड़ी व ट्यूबवैल हुए लबालब, तीन साल बाद नदी किनारे बसे गांवों में खुशी
सवाईमाधोपुर. वन की आशा' के नाम से जानी जाने वाली बनास सवाईमाधोपुर जिले में इसके किनारे बसे गांवों के लिए जन की आशाÓ से कम नहीं है। बनास जब पूरे शबाब के साथ बहती है तो लोगों की आशाएं पुनजीर्वित हो उठती है। इस बार बीसलपुर बांध भरने एवं उससे पानी छोड़े जाने के बाद बनास उफान पर है। वहीं चार साल बाद आसपास के गांवों के कुंओं, बावड़ी, ट्यूबवैल, तालाब में जलस्तर भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल एवं खेती के लिए ये पानी बहुत उपयोगी साबित होगा। करीब दो साल के पानी की भरपाई हो गई है। पत्रिका टीम ने बनास किनारे गांवों में जाकर हालात जाने। वहीं बनास से सुधरे जल स्तर को लेकर सवाईमाधोपुर से राकेश वर्मा, चौथ का बरवाड़ा से इरफान मंसूरी, खिरनी से मृत्युंजय गौतम की ग्राउंड रिपोर्ट।
टोंक जिले के बनेठा गांव के निकट से होकर बनास सवाईमाधोपुर जिले की चौथकाबरवाड़ा तहसील के गांव ईसरदा से करीब पांच किलोमीटर दूर से चौकड़ी सोलपुर से प्रवेश करती है, जो डिडायच देवली रपटा सहित विभिन्न गांवों से होकर त्रिलोकपुरा गांव तक जाती है। वहां से बौंली तहसील के नीमोद राठौद, गुडलाचंदन आदि गांवों में प्रवेश करती है। इसके बाद सवाईमाधोपुर तहसील के जटवाड़ा व दोबड़ा गांवों में प्रवेश करती है। वहां मलारनाडूंगर तहसील जोलन्दा महेसरा मोतीपुरा, भारजा नदी, दुब्बी बनास, भूखा, पीलवानदी, बिलोलीनदी होकर वापस सवाईमाधोपुर तहसील के खाट पढ़ाना, बाडोलास, ओलवाड़ बसौं, भूरी पहाड़ी तक जाती है। वहां से करौली के हाड़ौती व सपोटरा के गांवों को छूकर गुजरती है। यहां से खंडार तहसील के डूंगरी, भावपुर, डांगरा, पीलूड़ी, बाजौली, पिपलेट, क्यारदा, बालेर, डाबिच, परसीपुरा, बरनावदा, बी कला, बड़ौद, ओलमीणा, सिंगोर, धर्मपुरी, सेंवती, गांव होते हुए रामेश्वर घाट त्रिवेणी संगम में चम्बल व सीप नदी में जाकर मिल जाती है।
सवाईमाधोपुर के लिए कैसे है जन की आशा
चौथकाबरवाड़ा 1
चौथकाबरवाड़ा. तहसील के 30 किलोमीटर एरिया में फैली बनास किसानों के लिए इस बार वरदान साबित हो रही है। क्षेत्र में हुई इस साल अच्छी बारिश के चलते नदी उफान पर है। ऐसे में पिछले 2 साल से पानी की समस्या अब दूर होगी। जिस बनास नदी में चार साल तक पीने लायक पानी नहीं था। वह पिछले कई दिनों से नदी लगातार बह रही है। जिससे क्षेत्र के कुएं एवं भूमि का जल स्तर रिचार्ज हुआ है। पंचायत समिति की छह ग्राम पंचायतों के करीब डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों को बनास नदी से सटे होने से इनकी 7266 हैक्टेयर भूमि को फायदा मिलेगा। डिडायच सहित कई गांवों के कुंओं में मुंडेर से महज चार फीट नीचे पानी आ गया है। ग्रामीणों ने कहा की 2016 में ऐसा देखने को मिला है।
खिरनी 2
खिरनी. बनास नदी से करीब तीन किलोमीटर दूर खिरनी क्षेत्र के सभी गांवों में भूमिगत जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण पूर्व सरपंच सुरेश मीणा, खालिद अली, सौरभ अग्रवाल आदि ने बताया कि मई जून में जो 80 फीट गहराई वाले कुएं सूख गए थे, उनमें 70 फीट तक पानी आ गया है। कई में मुंडेर तक पानी आ गया है। 400 फीट गहराई वाले ट्यूबवैलों में पानी नाममात्र रह गया था। उनमें भी पानी जमकर आ रहा है। गर्मियों में पांच दिन में जलापूर्ति हो रही थी। लेकिन अब नियमित जलापूॢत मिल रही है। वहीं तीन साल तक के लिए किसानों के पानी की समस्या दूर सकेगी। क्षेत्र के गांवों की करीब 5 हजार हैैक्टेयर खेती की जमीन सिंचित हो सकेगी।
भूरी पहाड़ी3
बनास नदी से बिल्कुल सटे गांव भूरी पहाड़ी के कुंए बावड़ी लबालब हो गए हैं। वहीं गर्मियों में सूखी रहने वाली बनास पूरे वेग पर है। ग्रामीण हेमराज मीणा, रामधन मीणा आदि ने बताया कि 60 फीट गहरे कुंए सूख थे, लेकिन अब खूब पानी है।
30 मीटर पर पानी : जलदाय विभाग के सहायक अभियंता विशु शर्मा ने बताया की क्षेत्र में बारिश होने के बाद नदी क्षेत्र में 11.25 मीटर भूमिगत जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। गौरतलब है कि बारिश से पहले 42 मीटर गहराई पर पानी मिलता था, लेकिन अब 30.75 मीटर पर पानी उपलब्ध है।