
बामनवास. उपखण्ड क्षेत्र में राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सहित बरनाला, लिवाली, गुर्जर बड़ौदा एवं मीणा कोलेता स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को राज्य सरकार की ओर से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के अधिकार दे रखे हैं। जिसके बावजूद लोगों को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ग्राम पंचायत के पास भेजा जाता है। जिसमें लोगों को अनावश्यक देरी होती है, समय पर प्रमाण पत्र भी नहीं मिल पाते।
ब्लॉक सांख्यिकी एवं भामाशाह अधिकारी धर्मेन्द्र गुप्ता ने बरनाला स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का निरीक्षण कर जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रगति जानी तो उनके होश उड़ गए। चारों पीएचसी सहित सीएचसी द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य ही शुरू नहीं किया गया। जबकि राज्य सरकार वर्ष 2014 में ही चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों को ये अधिकार प्रदान कर चुकी थी। सभी संस्थानों को पहचान पोर्टल पर प्रमाण पत्र ऑनलाइन करने के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड दे दिए गए थे। जनवरी 2016 से फरवरी 2017 तक लिवाली में 74, बरनाला में 102, गुर्जर बड़ौदा में 2 तथा मीणा कोलेता में 10 बच्चों का जन्म हुआ। लेकिन इन बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ग्रामसेवक को आवेदन दे दिए गए।
ऐसे बनाया जा सकता है प्रमाण पत्र
विभागीय नियमानुसार अस्पताल से जन्म के 21 दिनों तक जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। 21 दिन के बाद, जन्म से एक माह तक एक रुपया विलम्ब शुल्क देकर संबंधित ग्राम पंचायत के ग्रामसेवक से प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है। एक माह से एक वर्ष की अवधि के बीच प्रमाण पत्र बनवाने के लिए विकास अधिकारी अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार या जिला सांख्यिकी अधिकारी जिला रजिस्ट्रार द्वारा शपथ पत्र द्वारा लिखित अनुशंसा से तथा एक वर्ष बाद उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार, कलक्टर और अतिरिक्त कलक्टर की अनुशंसा से जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए जा सकते हैं।
दिए हैं निर्देश
प्र्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं करने पर संबंधित चिकित्सा प्रभारियों को कार्यालय की ओर से निर्देश दिए गए हैं। वहीं रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भी भिजवाई गई है।
धर्मेन्द्र गुप्ता, ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी, पंचायत समिति बामनवास