
सवाईमाधोपुर. दीपोत्सव के निकट आते ही बाजारों में खरीदारी का दौर शुरू हो गया है। लोग अपने घरों को रोशनी से सजाने के लिए पारंपरिक दीपकों की खरीदारी में जुट गए हैं। इधर, बढ़ती मांग को लेकर कुम्हारों ने भी मिट्टी को दीपकों का आकार देना शुरू कर दिया है।
एक भट्टी से बनते है 3 हजार दीपक : कुम्हारों ने बताया कि एक भट्टी मिट्टी से करीब तीन हजार दीपकों का निर्माण हो जाता है। वहीं तीन हजार दीपकों को बनाने में करीब एक हजार रुपए की लागत आ जाती है।
साल- दर साल महंगी हो रही मिट्टी
कुम्हारों के लिए एक समस्या साल दर साल मिट्टी की कीमतों में हो रही वृद्धि भी है। गत वर्ष मिट्टी की ट्रॉली जो सात सौ से आठ सौ रुपए की मिल जाती थी वह अब एक हजार रुपए में मिल रही है। गौरतलब है कि वन विभाग ने वन क्षेत्र से मिट्टी का दोहन करने पर पाबंदी लगा रखी है। ऐसे में मिट्टी के भाव भी लगातार बढ़ रहे हैं।
बढ़ रहा इलेक्ट्रॉनिक चाक का चलन
इस बार परम्परागत चाक के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक चाक का चलन भी बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक चाक में दीपकों का निर्माण तेज गति से इलेक्ट्रॉनिक मोटर की मदद से किया जाता है।
थे गत वर्ष