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Rajasthan: पानी में बह गए डेढ़ करोड़ के वातानुकूलित टेंट, 3 साल पहले हुए थे तैयार, चंबल अभयारण्य में नाइट स्टे पर ब्रेक

राजस्थान के चंबल अभयारण्य में पालीघाट पर डेढ़ करोड़ रुपए के वातानुकूलित टेंट पानी में बह गए। तीन साल पहले तैयार टेंट से नाइट स्टे शुरू होना था, लेकिन तेज बारिश और चंबल का जलस्तर बढ़ने से योजना अटक गई।
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सवाई माधोपुर

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Arvind Rao

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Updated: 25 Oct 2026, 12:42 PM IST

chambal sanctuary air conditioned tent

पालीघाट पर तैयार किए गए वातानुकूलित टेंट (पत्रिका फाइल फोटो)

Rajasthan Chambal Sanctuary Air Conditioned Tent: सवाईमाधोपुर: राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के पालीघाट पर पर्यटकों के लिए शुरू की गई नाइट स्टे की योजना परवान नहीं चढ़ सकी। करीब तीन साल पहले वन विभाग की ओर से डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से पालीघाट पर पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए तीन वातानुकूलित टेंट तैयार कराए गए थे। योजना के तहत पर्यटकों को यहां ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन अधिकारियों के बदलने और तेज बारिश के कारण टेंट क्षतिग्रस्त होने के बाद इस योजना पर ध्यान नहीं दिया गया।

स्थिति यह है कि लाखों रुपए खर्च कर तैयार किए गए टेंट अब मौके पर नजर तक नहीं आते। इससे न केवल सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि पालीघाट में पर्यटन विकास की संभावनाओं को भी झटका लगा है।

पांच हजार रुपए रखा जाना था किराया

जानकारी के अनुसार, पालीघाट पर बनाए गए वातानुकूलित टेंट में एक पर्यटक के रात्रि विश्राम के लिए करीब पांच हजार रुपए किराया निर्धारित करने की योजना थी। इससे पर्यटकों को चंबल के प्राकृतिक वातावरण में ठहरने का अवसर मिलता। साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।

हालांकि, तेज बारिश और चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण तीनों टेंट क्षतिग्रस्त हो गए। इसके बाद इनकी मरम्मत और संचालन की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा सके। अधिकारियों के बदलने के साथ ही योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई।

पर्यटन को मिल सकता था बढ़ावा

पालीघाट पर नाइट स्टे की सुविधा शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन को नए आयाम मिल सकते थे। चंबल के प्राकृतिक सौंदर्य और घड़ियालों के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में पर्यटकों को रुकने की सुविधा मिलती तो उनकी संख्या बढ़ने की भी संभावना थी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होते और वन विभाग की आय में भी इजाफा हो सकता था।

इसके बावजूद योजना का धरातल पर शुरू नहीं हो पाना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। खास बात यह है कि वन विभाग की ओर से इसी पर्यटन सीजन में फाउंडेशन की राशि से टेंट की मरम्मत कराने का दावा किया जा रहा है। लेकिन वर्तमान स्थिति में पालीघाट पर टेंट का नामोनिशान तक नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मौके पर टेंट ही मौजूद नहीं हैं, तो उनकी मरम्मत आखिर किसकी कराई जाएगी।

इसी सीजन में मरम्मत कराने का दावा

सवाईमाधोपुर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेज बारिश के कारण टेंट क्षतिग्रस्त हो गए थे। अब इन्हें दुरुस्त कराकर पर्यटकों के लिए शुरू करने की तैयारी है। हालांकि, टेंट की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मरम्मत और संचालन की योजना को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

इनका कहना है…

पूर्व में तेज बारिश और चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण टेंट क्षतिग्रस्त हो गए थे। जल्द ही टेंट की मरम्मत कराकर उन्हें शुरू किया जाएगा।
-किशन कुमार सांखला, रेंजर, पालीघाट

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