सवाई माधोपुर

गंगापुरसिटी में सुदामा का प्रसंग सुन लोगों की आंखें हुई नम

सुदामा का प्रसंग सुन आंखें हुई नम
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गंगापुरसिटी में सुदामा का प्रसंग सुन लोगों की आंखें हुई नम
गंगापुरसिटी में सुदामा का प्रसंग सुन लोगों की आंखें हुई नम

गंगापुरसिटी. आदर्श नगर स्थित मैरिज होम में आयोजित भागवत कथा में शनिवार को कथा वाचक आचार्य गिरधर कृष्ण ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन किया। दोनों के मित्रता के भाव सुन कर श्रौताओं की आंखे नम हो गई। उन्होंने संदेश दिया कि जिसका सुदामा जैसा त्यागमय जीवन होगा, परमात्मा उनके चरण धोएंगे।
इस अवसर पर सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया, भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री सतीश पूनिया, भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश जैन, संतोष दुबे, सुशील दीक्षित, गोविन्द पाराशर, शैलेन्द्र शर्मा, दर्शन गुर्जर, महेन्द्र दीक्षित, चंद्रशेखर दुबे, विशम्भर पांडे, भागीरथ मीना आदि थे।


पौराणिक कथाओं से बढ़ता है भाईचारा
क्षेत्र के गांवों में हरिकीर्तन दंगल में पौराणिक कथाएं सुनने को मिल रही है। ग्राम पंचायत श्यारौली व खानपुर बड़ौदा में शनिवार को आयोजित दंगल में कई स्थानों की मंडलियों ने धार्मिक व पौराणिक रचनाएं पेश की। कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि विधायक मानसिंह गुर्जर ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से भाईचारा व सद्भाव बढ़ता है। नई पीढ़ी को पुरानी कथाएं जानने का मौका मिलता है।


इस अवसर पर पूर्व सभापति हरिप्रसाद बोहरा, पंचायत समिति सदस्य घनश्याम शर्मा, उदयसिंह गुर्जर, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमप्रकाश शर्मा, वजीरपुर मंडल अध्यक्ष दामोदर शर्मा आदि का ग्रामीणों की ओर से स्वागत किया गया। श्यारौली में धर्मसिंह पहलवान, बनेसिंह, बहादुर जाट, हजारी जाट, भगवानसिंह आदि ग्रामीण मौजूद थे। वहीं खानपुर बड़ौदा में में मंच संचालन मन्नूलाल मीना ने किया।


भगवान इच्छा पूरी करने के प्रति संकल्पित
बामनवास. कीरतपुरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को पंडित हरिमोहन जैमन ने कहा कि परमात्मा को मानने वाले पर सदा उसकी कृपा बनी रहती है। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि सुदामा को योग भाया ही नहीं। कृष्ण ने सुदामा पर कृपा बरसाई तो सुदामा जीता। अपना सर्वस्व परमात्मा को समर्पित करने वाले को कभी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि हमें प्रभु कितना ही बड़ा बनाए, लेकिन दीनहीनों पर हमें प्रेम तथा दया अवश्य रखनी चाहिए। गुरु महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि हर समय जिससे कुछ सीखने को मिले, वहीं हमारा गुरु है। अंतिम दिन व्यासपीठ से आचार्य ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत श्रवण का महात्म्य बताया। कलियुग में मान सम्मान और पात्र-कुपात्र की व्याख्या की। आयोजन से जुड़े शिवचरण शर्मा ने बताया कि शनिवार को श्रीमद्भागवत का पूजन कार्यक्रम हुआ। जिसमें दर्जनों श्रद्धालु शामिल हुए।

Published on:
27 May 2018 12:55 pm