सरिस्का अभयारण्य को आबाद करने वाली राजमाता के नाम से विख्यात मछली की बेटी बाघिन एसटी-2 का स्मारक बनकर तैयार हो गया है।
शुभम मित्तल
Sawaimadhopur: रणथम्भौर में बाघों की अम्मा के नाम से मशहूर बाघिन मछली अपने स्मारक को भले ही तरस रही हो, लेकिन सरिस्का अभयारण्य को आबाद करने वाली राजमाता के नाम से विख्यात मछली की बेटी बाघिन एसटी-2 का स्मारक बनकर तैयार हो गया है।
हालांकि वन मंत्री संजय शर्मा ने दोनों जगह पर ही स्मारक बनाने की घोषणा की थी, लेकिन पहले बेटी का स्मारक बनाया गया है। इसका शनिवार को उद्घाटन किया जाएगा। जबकि प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व को अपनी संतानों से आबाद करने वाली बाघिन मछली का स्मारक अब तक रणथम्भौर में नहीं बन सका है। ऐसे में वन्यजीव प्रेमियों में रोष है। इसके लिए पूर्व में कई बार सामाजिक संगठन और वन्यजीव प्रेमी विभाग व जनप्रतिनिधियों से मछली का स्मारक बनाने की मांग कर चुके हैं।
मछली की मौत 18 अगस्त 2016 को रणथम्भौर के एक होटल में हुई थी। आमाघाटी में अंतिम संस्कार किया। इस कारण विभाग ने यहां स्मारक निर्माण के लिए चबूतरा बनाया, लेकिन बाद में काम रुक गया।
पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि मछली रणथम्भौर की शान रही है और न केवल रणथम्भौर बल्कि प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व भी बाघों की दहाड़ गूंजाने में मछली और उनकी संतानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
रणथम्भौर में बाघिन मछली के स्मारक का निर्माण किया जाना है। इसके लिए स्थान को भी चिह्नित कर लिया गया है। टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं। जल्द स्मारक निर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा।
रामानंद भाकर, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर