सवाई माधोपुर

रणथम्भौर: 5 साल 88 वन्यजीवों का हुआ शिकार

तीन बाघों का भी हुआ शिकार
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रणथम्भौर: 5 साल 88 वन्यजीवों का हुआ शिकार
रणथम्भौर: 5 साल 88 वन्यजीवों का हुआ शिकार

सवाईमाधोपुर.रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान पर पिछले कई सालों से शिकारियों का साया मण्डरा रहा है। जो अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। रणथम्भौर में वन विभाग शिकार व अन्य अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है। यह हम नहीं कह रहे हैं वन विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। इसका ताजा मामला हाल में ही रणथम्भौर की फलौदी रेंज के भैरूपुरा वन क्षेत्र में रात के अंधेरे में बंदूकधारी शिकारियों द्वारा चीतल का शिकार का है। लेकिन रणथम्भौर में वन्यजीवों के शिकार का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहां कई बार वन्यजीवों का शिकार हो चुका है। कई मामलों में वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए शिकारियों को दबोचा है तो कई मामलों मेंअब भी शिकार के आरोपी वन विभाग की पकड़ से दूर है।
बाघ से लेकर जंगली ***** तक सभी का किया शिकार
रणथम्भौर में पिछले पांच सालों में अब तक कुल 88 वन्यजीव शिकारियों के हत्थे चढ़ चुके हैं। वनाधिकारियों ने बताया कि इनमें शिकारियों ने बाघ से लेकर नीलगाय तक को अपना निशाना बनाया है। वन विभाग की ओर से अब तक अधिकतर मामलों में आरोपियों को पकड़ भी लिया गया है। कई मामलों में अब तक आधे आरोपी ही वन विभागकी पकड़ में आए हैं। वनाधिकारियोंने बताया कि शिकारियों ने बाघ, जंगली सुअर,नीलगाय, मोर, सांभर, चीतल आदि वन्यजीव शामिल है। इनमें से 39 मामले न्यायालय में विचाराधीन है और 49 मामलों में विभागीय स्तर पर जांच में हैं।
तीन बाघों का हुआ शिकार
वनाधिकारियों ने बताया कि पिछले पांच सालों में रणथम्भौर में तीन बाघों का शिकार हुआ है। इनमें से दो बाघों का शिकार को 17 अप्रेल 2018 को रणथम्भौर की फलौदी रेंज के आवण्ड क्षेत्र में बाघिन टी-79 के दो शावकों का शिकारहुआ था। वन विभाग की ओर से बाघ के शरीर में कीटनाशक के अंश मिलने के बाद अज्ञात शिकारियों के खिलाफ बाघों का शिकार करने का मामला दर्ज किया गया था। हालांकि अब तक इस मामले में शिकारी वन विभाग की पकड़ से दूर हैं। वहीं पूर्व में छाण में खेतों में आए बाघ टी-28 को रेसक्यू करने गई वन विभाग की टीम को बाघ को रेसक्यू करते समय ग्रामीणों ने रोका था। ऐसे में बाघ को समय पर उपचार नहीं मिल सका था इस मामले में को भीवन विभाग ने अप्रत्यक्ष रूप से शिकार की श्रेणी में माना था। इस मामले में खण्डार पुलिस ने मार्च 2019 में 11 लोगों को गिरफ्तार किया था।
मध्यप्रदेश के शिकारियों की भी रणथम्भौर पर नजर
वनाधिकारियोंं ने बताया कि रणथम्भौर में मध्यप्रदेश के श्योपुर व अन्य जिलों के शिकारी भी सक्रिय हैं। रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान की सीमा मध्यप्र्रदेश से सटी हुई हैं। ऐसे में स्थानीय शिकारियों की साठ गांठ से रणथम्भौर में मध्यप्रदेश के शिकारी भी वन्यजीवों को शिकार बना रहे हैं। करीब तीन साल पहले एमपी के शिकारियों ने रणथम्भौर में मोर का शिकार किया था। लेकिन इस मामले में अब तक शिकारी वन विभाग की पकड़ से दूर है।

Updated on:
16 Feb 2020 12:03 pm
Published on:
16 Feb 2020 12:03 pm
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