
गंगापुरसिटी. त्योहारी सीजन में खाद्य सामग्री के बढ़ते दाम निर्धन और मध्यमवर्गीय लोगों के लिए मिठाई-नमकीन का स्वाद कसैला कर रहे हैं। बाजार में त्योहार पर सर्वाधिक उपयोग आने वाली सामग्री घी-तेल, मेदा, बेसन व आटा के भाव बढ़ रहे हैं। आसमान छू रहे इन दामों ने लोगों का त्योहार पर खुशी का मूड बिगाड़ कर रख दिया है। वे रसोई बजट गड़बड़ाने की चिंता में डूबे हैं। पिछले एक पखवाड़े में 15 लीटर शुद्ध घी के टिन के दामों में 400 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह मैदा, चने, दाल, बेसन व आटा के भावों में भी तेजी आई है। बताया गया है कि शहर में अधिक मांग के बीच माल की कमी के कारण घी के दाम बढ़े हैं। एक पखवाड़े पहले शुद्ध घी का पीपा 5500 से 5600 रुपए में आ रहा था। अब इसके भाव 5900 से 6000 रुपए पहुंच गए हैं। पुरानी अनाज मण्डी में विक्रेताओं ने बताया कि एक पखवाड़े में एक-दो को छोड़कर घी के सभी ब्रांड के भावों में तेजी आई है। इसी तरह दो दिन पहले मैदा का 50 किलो का कट््टा 1170 रुपए में बिक रहा था, जो अब बढ़कर 1195 का हो गया है।
चने की दाल में तेजी
एक सप्ताह पहले बाजार में चने की दाल 120 रुपए किलो थी जो अब 145 रुपए हो गई है। चने में तेजी से बेसन भी महंगा हुआ है। आठ दिन पहले बेसन के भाव 125 रुपए किलो थे, जो अब 150 रुपए किलो हो गए हैं। दीपावली पर मिठाई व अन्य खाद्य सामग्री में बेसन की मांग अधिक रहने से इसके दामों में और वृद्धि की आशंका व्यक्त की जा रही है।
दाम के साथ बढ़ा कारोबार
दाम बढऩे के बावजूद घी व्यवसायी इस बार अधिक कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं। घी विक्रेताओं ने बताया कि पिछली दिवाली के मुकाबले इस बार सभी प्रकार का घी अधिक बिक रहा है। पुरानी मण्डी में घी की 15 दुकानें हैं। इन दुकानों पर पिछली दिवाली पर घी का कारोबार 10 लाख रुपए हुआ था। इस बार 20 लाख रुपए का व्यवसाय होने की संभावना है।
बोले विक्रेता
त्योहारी दौर में माल की कमी व बाजारी खपत के चलते घी के भाव बढ़े हंै। सरस घी कॉपरेटिव डेयरी का होने से इसके दाम यथावत हैं। अन्य घी निजी डेयरी होने से दामों में वृद्धि हुई है।
संतोष अग्रवाल
चना उपलब्ध नहीं होने व माल स्टॉक कम होने के कारण चने की दाल के दाम बढ़े हैं। पैदावार कम होने से भी चना भाव बढ़े है। किसानों को बीज के लिए भी जरूरत पड़ रही है।
हनुमानप्रसाद गुप्ता