
सवाईमाधोपुर. सरकार की ओर से महिलाओं को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए घरेलू हिंसा व दहेज प्रताडऩा के विरोध में कड़ा कानून बनाया गया है लेकिन अब ये कानून महिला सुरक्षा के लिए बल्कि महिलाओं गलत तरीके से एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। घरेलू हिंसा व दहेज प्रताडऩा के करीब आधे मामले फर्जी पाए गए हैं। जिले में 2015 से सितम्बर 2021 तक दहेज प्रताडना के कुल कुल 4067 मामले दर्ज किए गए जिनमें से 1778 मामले झूठे पाए गए।
महिला थाने में सबसे अधिक मामले
जानकारी के अनुसार 2015 से सितम्बर 2021 तक महिला थाने में दहेज प्रताडऩा के कुल 726 मामले दर्ज किए गए इनमें से कुल 338 मामले झूठे पाए गए हैं। वहीं सितम्बर 2021 तक इस साल महिला थाने में महिला अत्याचार के कुल 103 मामले दर्ज किए गए जिनमें से 31 मामले फर्जी पाए गए।
पिलौदा में दर्ज हुए सबसे कम मामले
महिला अत्याचारों के सबसे कम मामले पिछले सात साल में जिले के पिलौदा थाने में दर्ज किए गए। यहां पिछले सात सालोंं में कुल 77 मामले दर्ज किए गए जिनमें से 38 मामले झूठे पाए गए। वहीं उदेई मोड थाने में कुल 114 मामले दर्ज किए गए थे।इनमें से 57 मामले फर्जी निकले। हालांकि उदेई मोड थाने में 2015 से 2018 तक महिला अत्याचार का एक भी मामला सामने नहीं आया था।
यह है प्रावधान
दहेज प्रताडऩा के तहत आईपीसी की धारा 498 ए के तहत मामला दर्ज किया जाता है और जांच के बाद आरोप सिद्ध होने पर दोषी को तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। वहीं आईपीसी की धारा 182 के तहत यदि किसी भी लोकसेवक को कोई भी व्यक्ति झूठी सूचना देता है या फिर झूठी शिकायत दर्ज कराता है तो शिकायत के झूठा पाए जाने पर संबंधित लोकसेवक सूचना देने वाले व्यक्ति के तहत रिपोर्ट दर्ज करा सकता है। ऐसे में 6 माह तक की सजा का प्रावधान है। लेकिन अब तक जिले में इतनी बड़ी संख्या में मामलों के झूठा पाए जाने के बाद भी किसी के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।
कहां कितने मामले....
थाना दर्ज झूठे
पिलौदा 77 38
बाटोदा 150 63
वजीरपुर 168 67
उदेई मोड 114 57
सदर गंगापुर 164 71
बामनवास 256 115
गंगापुर सिटी 483 207
मलारना डूंगर 349 142
बहरावण्डा कला 117 39
सूरवाल 222 97
चौथ का बरवाड़ा 209 90
खण्डार 255 103
मानटाउन 87 42
रवांजना डूंगर 259 120
बौंली 431 189
महिला थाना 726 338
कुल 4067 1778
इनका कहना है....
महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाया गया है। पति- पत्नी में कई बार विवाद होने के कारण वे एक दूसरे से अलग रहने लगते है। ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने पर 498 ए के तहत ही मामला दर्ज किया जाता है। हालांकि अधिकतर मामलों में आपसी समझाइश से बाद में दोनोंं में समझौता हो जाता है। हमारा प्रयास ऐसे मामलों का आपसी समझाइश से हल कराने का होता है। बहुत ही कम ऐसे मामले होते हैं जो पूरी तरह से झूठी शिकायत करके दर्ज कराए जाते हैं।
- राजेश सिंह, पुलिस अधीक्षक, सवाईमाधोपुर।
एक्सपर्ट व्यू....
महिलाओं की सुरक्षा के लिए घरेलू हिंसा व दहेज प्रताडऩा के कानून बनाए गए है। हमारे जिले में ऐसे भी कई मामले है जो शिकायत तो घरेलू हिंसा की है लेकिन मामला दहेज प्रताडऩा में दर्ज किया गया है। इससे जिनके खिलाफ मामला दर्ज होता है उसके पूरे परिवार को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं जब जिले में हजारों की संख्या में मामले झूठे पाए गए हैं तो संबंधित लोक सेवक द्वारा परिवादियों के खिलाफ रिपोर्ट क्यों दर्ज नहीं कराई जा रही है।
- हरिप्रसाद योगी, सामाजिक कार्यकर्ता, अध्यक्ष कंज्यूमर लीगल हेल्प सोसायटी, सवाईमाधोपुर।