
नई दिल्ली। सफेद दाग यानी विटिलिगो को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई खोज की है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी पद्धति विकसित की है जिसकी मदद से कुछ ही हफ़्तों में सफेद रोग से पीड़ितों को निजात मिल जाएगी। सफेद दाग को कुष्ठ रोग मानकर पीड़ित लोगों को परिवार से अगल रखा जाता है जबकि यह कुष्ठ रोग से अलग सिर्फ एक त्वचा रोग है। इस रोग में शरीर पर सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं।
अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के शोधकर्ता जॉन हैरिस ने बताया कि आज के समय में इसके इलाज में एक से दो साल का वक्त लग जाता है। कई बार इलाज रोकने के सालभर बाद फिर उसी जगह दाग दिखने लगते हैं। इस दिक्कत के बारे में जॉन हैरिस बताते हैं कि दोबारा उसी जगह दाग इसलिए बनते हैं, क्योंकि त्वचा की कोशिकाएं उस जगह के बारे में जानती हैं जहां पर पहले से दाग मौजूद थे। यही कारण है कि वे फिर वहीं पनप जाती हैं।
हाल ही में वैज्ञानिकों ने सफेद दाग यानी विटिलिगो के इलाज में उन कोशिकाओं के बारे में पता कर लिया है जो दोबारा पनप जाती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन कोशिकाओं को निष्क्रिय करने से सफेद दाग का इलाज जल्दी हो सकेगा और दोबारा इसे होने से भी ज्यादा समय तक रोका जा सकेगा। शोधकर्ताओं ने रोग पैदा करने वाली मेमोरी कोशिकाओं को अलग कर उनका अधिक बारीकी से विश्लेषण किया है। वे यह निर्धारित करने में सक्षम हैं कि ये कोशिकाएं विशेष रूप से मेलानोसाइट्स को टारगेट करती हैं।