
नई दिल्ली। आज के बीजी लाइफ में बच्चों पर ध्यान देना बहुत ही मुश्किल हो गया है। जिसके कारण उनके खान-पान पर इसका बुरा असर (effect ) पड़ रहा है। इसको लेकर बच्चों के मां-बाप अक्सर काफी परेशान (tensed ) रहते हैं। इसके लिए वो अपने बच्चों के हेल्थ और खान से संबंधित डायटिशियन से कंसर्ट करते हैं। लेकिन उससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता। खासतौर पर बच्चों को हरी सब्जियां खिलाने के काफी जद्दोजहद करनी पड़़ती है। लेकिन इसके अलावा उन्हें कुछ भी खिला दिया जाए तो वो खुशी-खुशी खा-लेते हैं।
स्विटजरलैंड ( Swaziland ) की न्यूट्रिशन ( nutrition) साइंटिस्ट क्रिस्टीन ब्रोमबाख यूनिवर्सिटी ( university ) ने बताया कि ऐसा बच्चों में स्वाद ( taste ) की वजह से होता है। उन्हें हरी सब्जियों का स्वाद -बेस्वाद लगता है जिसके कारण छोटे बच्चे सब्जियों को देखना भी पसंद नहीं करते। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसकी शुरुआत जन्म से पहले ही हो जाती है।
दरअसल, जब बच्चा भ्रूण होता है तो उसको स्वाद की समझ एमनियोटिक फ्लूइड पीने से होती है। यह एक ऐसा द्रव है जो मां के ग्रर्भ में होता है इससे मां जो भी खाती है इसके स्वाद को असर एमनियोटिक द्रव पर पड़ता है। जिसके कारण बच्चे के पैदा होने से पहले उसको कई स्वाद का पता होता है।
गौरतलब है जब नवजात शिशु को कड़वी चीजों को खाने से पहले ही संकेत मिल जाता है कि यह जहरीली चीज है। जिसके कारण उन्हें मीठी चीजें ही पसंद आती है।