
नई दिल्ली -आमतौर पर बाजार में हमें कई तरह के साबुन दिखाई देते हैं इनमें से कोई लाल तो कोई पीले रंग का होता है। साथ ही ये साबुन अलग-अलग कंपनियों के होते हैं। लेकिन फिर भी ये सभी एक ही तरह का झाग छोड़ते हैं वो भी सफेद रंग का। क्या आपने कभी इस ओर ध्यान दिया कि ये अलग -अलग रंगों के साबुन एक ही रंग का झाग क्यों छोड़तें हैं। तो चलिए हम आपकों बताते हैं कि एेसा क्यों होता है।
बचपन में ही विज्ञान की पढ़ाई के दौरान यह नियम सिखाया-समझाया जाता है कि किसी वस्तु का अपना कोई रंग नहीं होता। उस पर जब लाइट पड़ती हैं तो वह बाकी रंगों को सोखकर जिस रंग को परावर्तित करती है, वही उसका रंग होता है। यही नियम कहता है कि जब कोई वस्तु सभी रंगों को सोख लेती है तो वह काली और सभी रंगों को परावर्तित करती है तो सफेद दिखती है।
साबुन का झाग सफेद दिखाई देने के पीछे भी यही कारण है। झाग कोई ठोस पदार्थ नहीं है। इसकी सबसे छोटी इकाई पानी, हवा और साबुन से मिलकर बनी एक पतली परत होती है। यह पतली परत जब गोल आकार ले लेती है,दरअसल साबुन का झाग बहुत सारे छोटे बुलबुलों का समूह होता है।
झाग बनाने वाले छोटे-छोटे बुलबुले भी इसी तरह की सतरंगी पारदर्शी होते हैं। लेकिन ये इतने बारीक होते हैं कि अव्वल तो इनमें हम सातों रंगों को नहीं देख पाते, वहीं दूसरी ओर इनमें प्रकाश इतनी तेजी से घूमता है कि ये एक ही समय पर तकरीबन सभी रंगों को परावर्तित करते रहते हैं। इसलिए यहां पर रंगों से जुड़ा विज्ञान का वही नियम लागू होता है जिसके मुताबिक कोई वस्तु अगर सभी रंगों को परावर्तित कर दे तो उसका रंग सफेद दिखाई देगा। इस तरह साबुन का झाग हमें सफेद दिखाई देता है।