
इन चीजों पर वैज्ञानिकों का भी सिर चक्करा जाता है, क्या हैं वो ऐसी रहस्यमय चीजें...
नई दिल्ली : विज्ञान कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठा चुका है और कई ऐसे रहस्य हैं जिनपर से पर्दा उठना बाकि है। मगर लोग ऐसे रहस्यों को आध्यात्म से जोड़कर देखने लगते हैं या फिर अदृश्य व पराशक्ति मान पूजने लगते हैं।आपकों बता दें कि प्राचीन काल की कुछ ऐसी चीजें हैं जो कब और कहा से आई हैं किसी को नहीं पता। उनमें से कुछ रामयुग के समय से जुड़ी चीजें हैं, जिनमें से इच्छाधारी नाग, संजीवनी बूटी और सोमरस इनके बारे में धार्मिकspiritual किताबों में पढ़ते आए हैं।लेकिन इसका साइंटिफिक अर्थ नहीं मिल पाया है। चलिए आपको बताते हैं क्या हैं वो...
संजीवनी बूटी
रामायण काल में उल्लेख मिलता है कि जब लक्ष्मण युद्ध में मेघनाद के भयंकर अस्त्र से मरणासन्न स्थिती में आ जाते हैं, तब हनुमान जी उनके लिए संजीवनी बूटी लेकर आते हैं। तो हनुमानजी इस बूटी को पहचान नहीं पाए और पूरा पर्वतmountain भी उठा लाए और लक्ष्मण को मृत्यु के मुख से खींचकर जीवनदान दिया गया।
हालांकि कुछ शोधकर्ताओं ने हिमालय के इलाके में ऐसे ही अनोखे पौधों की खोज की है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह पौधा एक ऐसी औषधि के रूप में काम करता है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को रेगुलेट करता है और हमें रेडियोएक्टिविटी से भी बचाता है।
इच्छाधारी नाग
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सांप ऐसा जीव है जिसे हिंदू धर्म में गाय के बाद दूसरा दर्जा दिया जाता है। तथा भारत india में सांपो की पूजा की जाती है। तथा ग्रंथों में भी इन सांपों के बारे में उल्लेख किया गया है कि भगवान विष्णु सांप के ऊपर विराजमान है।
मान्यता है कि जिन सांपो की 100 वर्ष से ज्यादा उम्र होने के बाद उनमें उड़ने की और मनचाहा रूप लेने की क्षमता आ जाती है। तथा कुछ सांपों के पास एक मणी होती है जो बेहद शक्तिशाली होती है। अगर यह मणि किसी इंसान को मिल जाए तो वह इंसान अमर और अजय हो जाता है। हालांकि इन सभी बातों का कोई प्रमाण नहीं है। जिस पर वैज्ञानिक भी खोज करने में लगे हैं।
सोमरस
वहीं दूसरी ओर सोमरस है। सोमरस का स्वर्ग की अप्सराओं व देवताओं को एक खास तरह का पेय पदार्थ पिलाती थी। जिसे सोमरस कहा जाता था। कुछ लोगों का मानना है कि सोमरस असल में शराब का ही रूप है| लेकिन ऋग्वेद में शराब की घोर निंदा करते हुए कहा गया है कि शराब पीने वाले अक्सर युद्ध और मारपीट या उत्पात मचाया करते हैं।
असल में वेदों में शराब को सोमरस नहीं बल्कि सुरा कहा गया है। तथा सोमरस असल में भांग का ही एक रूप था। उसे भगवान शिव के साथ अन्य देवता पिया करते थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऋग्वेद में सोमरस दही और दूध मिलाने की बातें कही गई है। जबकि अभी तक इसके बारे में वैज्ञानिक पता नहीं लगा पाये हैं कि आखिर में सोमरस क्या था।
Updated on:
7 Apr 2019, 4:38 PM IST
Published on:
7 Apr 2019, 2:12 PM IST
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