केंद्र सरकार ने अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन के लिए जो प्रस्तावित ड्रॉफ्ट तैयार किया है, सीहोर में इसका विरोध हो रहा है। शनिवार को जिला न्यायालय में जिला अधिवक्ता संघ की बैठक हुई। जिला बार एसोसिएशन सोमवार को हड़ताल करेंगे। संघ के अध्यक्ष राधेश्याम यादव व सचिव राजेश वर्मा ने बताया कि राष्ट्रपति और […]
केंद्र सरकार ने अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन के लिए जो प्रस्तावित ड्रॉफ्ट तैयार किया है, सीहोर में इसका विरोध हो रहा है। शनिवार को जिला न्यायालय में जिला अधिवक्ता संघ की बैठक हुई। जिला बार एसोसिएशन सोमवार को हड़ताल करेंगे। संघ के अध्यक्ष राधेश्याम यादव व सचिव राजेश वर्मा ने बताया कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर बालागुरु के को ज्ञापन देंगे। यह प्रस्ताव वकीलों के अधिकारों और स्वतंत्रता के खिलाफ है। प्रस्तावित अधिनियम के अनुसार यदि वकीलों ने हड़ताल की या अदालत के जाएगा। वकीलों के लिए कोई सुरक्षा प्रावधान नहीं रखा गया है, जिससे वे मनगढ़ंत शिकायतों का शिकार हो सकते हैं। धारा 36 के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया को किसी भी वकील को तुरंत निलंबित करने का अधिकार दिया गया है। कामकाज का बहिष्कार किया तो उन पर 3 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा। यह कानून अधिवक्ता समुदाय के खिलाफ है।
जिला अधिवक्ता संघ सचिव राजेश वर्मा ने बताया की अधिवक्ता अधिनियम में किए जा रहे बदलाव को लेकर विरोध किया जाएगा। 24 फरवरी को सीहोर न्यायालय के सभी अधिवक्ता इस संशोधन बिल के विरोध में न्यायालयीन कार्य से विस्त रहकर प्रदर्शन करेंगे। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन दिया जाएगा।
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राधेश्याम यादव ने बताया की सरकार जो प्रस्ताव लेकर आ रही है, इसका असर अधिवक्ता की आजादी पर पड़ेगा। वकीलों की सर्वोच्च संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश देने का अधिकार दिया है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर असर भी पड़ेगा।
अधिनियम में वकीलों को हड़ताल और बहिष्कार का सर्वैधानिक अधिकार दिया जाए। झूठी शिकायतों के खिलाफ यकीलों की सुरक्षा का प्रावधान जोड़ा जाए। बार काउंसिल के निर्णयों को न्यायिक समीक्षा के तहत लाया जाए।
धारा 35 ए के तहत वकीलों को हड़ताल और बहिष्कार करने से रोका गया है। धारा 35 के तहत वकीलों पर 3 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति झूठी शिकायत करता है तो उस पर मात्र 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया वकीलों के लिए कोई सुरक्षा प्रावधान नहीं रखा गया है, जिससे वे मनगढ़ंत शिकायतों का शिकार हो सकते हैं। धारा 36 के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया को किसी भी वकील को तुरंत निलंबित करने का अधिकार दिया गया है।