सीहोर

पिता की अस्थियां विसर्जित करते ही पुत्र ने भी तोड़ा दम, सीहोर में दो मौतों से घर में कोहराम

Devendra Singh from Sehore burned alive- दौसा बस हादसे में सीहोर, झाबुआ, इंदौर, खरगोन के कई लोगों की मौत, 8 लोगों की गई जान
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Jul 02, 2026
Devendra Singh from Sehore burned alive in Dausa bus accident
Dausa bus accident- दौसा बस हादसे में जिंदा जले सीहोर के देवेंद्र सिंह- Image Patrika.com

Sehore - ऋषिकेश से इंदौर आ रही एक स्लीपर बस में राजस्थान के दौसा में टक्कर के बाद आग लग गई। आग की लपटों के बीच घिरने से बस में चीख पुकार मच गई। इस भीषण बस अग्निकांड में 8 लोगों की मौत हो गई जिनमें अधिकांश एमपी के हैं। किसी ने अपने पति को खो दिया तो कोई अपनी जीवन संगिनी को ही गंवा बैठा। अंदर का मंजर देखनेवाले अस्पताल में भर्ती घायलों और इंदौर में परिजनों ने बताया कि ऐसा नजारा था कि हमारी रूह कांप उठी। कई यात्रियों के शव सीट से ही चिपके रह गए। कुछ शव कंकाल ​बनकर बस में नीचे बिखरे पड़े थे। खाक हो चुके शवों की पहचान भी मुश्किल है। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही मृतकों की पहचान होगी। बस में सीहोर के देवेंद्रसिंह भी सवार थे जोकि हादसे में जिंदा जल गए। खास बात यह है कि उनके पिता का भी कुछ दिनों पहले ही देहांत हुआ था। उनकी अस्थियां विसर्जन करने ही देवेंद्र हऱिद्वार गए थे लेकिन लौटते वक्त हादसे का शिकार हो गए। पिता के बाद पुत्र की यूं आकस्मिक मौत से परिवार में कोहराम मच गया है।

दौसा में हुए बस हादसे में झाबुआ के धर्मसिंह की भी मौत हो गई। उन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया था पर इलाज मिलने में देरी हो गई। धर्मसिंह ने अपने दोस्त कालू की बाहों में ही तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया। स्लीपर बस में इंदौर के दीपक, अपनी पत्नी दिव्या और दोनों बच्चों के साथ सवार थे। हादसे में पत्नी और बच्चे बच गए पर परिवार ने उन्हें खो दिया। बस हादसे में मौतों पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दुख जताया है।

परिजनों के विलाप ने हर किसी की आंखें नम कर दीं

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई थी। हर कोई अपनों को खोज रहा था। अस्पताल में तो और भी भावुक करनेवाले दृश्य दिखाई दिए। मृतकों के परिजनों के विलाप ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

पिता की अस्थि विसर्जन करने गए, खुद जिंदा जले

बस हादसे में सीहोर ने भी अपने एक बेटे को खो दिया। यहां के रहनेवाले नरपत सिंह का कुछ दिन पहले निधन हो गया था। उनकी अस्थियों के विसर्जन के लिए पुत्र देवेन्द्र सिंह हरिद्वार गए थे। अस्थि विसर्जन के बाद वे इसी स्लीपर बस से घर लौट रहे थे कि रास्ते में हादसा हो गया। देवेन्द्र सिंह बस में आग की लपटों में बुरी तरह घिर गए और जिंदा जल गए। वे 45 वर्ष के थे। दौसा में बस दुर्घटना में देवेंद्र सिंह की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।

Updated on:
02 Jul 2026 09:35 am
Published on:
02 Jul 2026 08:40 am