सीहोर

‘मंदिरों का पैसा सरकार क्यों ले रही?’… देवकीनंदन ठाकुर का बड़ा बयान

Devkinandan Thakur Comments: देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन बोर्ड और देश की पहली सनातन प्रीमियर लीग की घोषणा की। वहीं, मंदिरों के पैसों को लेकर कथावाचक ने सरकार पर निशाना साधा।

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Feb 20, 2026
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devkinandan thakur demands sanatan board (फोटो- पंडित प्रदीप मिश्रा फेसबुक पेज)

MP News:सीहोर के कुबेरेश्वर महादेव मंदिर मैं रुद्राक्ष महोत्सव, शिवमहापुराण कथा के छठवें दिन गुरुवार को उज्जैन से वामी रंगनाथ महाराज और कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर पहुंचे। देवकीनंदन ने मंच से 'सनातन बार्ड' बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा सनातन प्रीमियर लीग के माध्यम से युवाओं को धर्म से जोड़ने की पहल की सराहना की।

यह भारत की की पहली सांस्कृतिक और सामाजिक क्रिकेट लीग है, जिसका उद्देश्य खेल के माध्यम से बच्चों की धर्म के संस्कारों से जोड़ना है। इंदौर के नेहरू स्टेडियम में 13 मार्च से देश का पहला सनातन प्रीमियर लीग होगा, जिसमें देशभर से चुनी आठ टीमें खेलेंगी। 15 मार्च को फाइनल होगा, जिसमें विजेताओं को ट्रॉफी दी जाएगी। इंदौर से आए रंगनाथ महाराज ने गौसेवा व गो-अभिवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया।

मंदिरों का धन भक्तों के लिए हो- देवकीनंदन

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर (Devkinandan Thakur) ने कहा कि हमारे मंदिरों का पैसा सरकार लिए जा रही है और उस पैसे का क्या हो रहा है, हमें नहीं पत्ता। यह पैसा भगवान का पैसा है, शास्त्र कहते हैं कि भगवान के पैसे पर किसी का अधिकार नहीं है। भगवान के पैसे का उपयोग उनके भक्तों की सेवा में किया जाना चाहिए।

मंदिरों के पैसे से मॉडल गुरुकुल बने, गोशाला बने, गरीब भाई बहनों की सहायता हो, उनकी बेटियों की शादी की जाए, रोगियों का इलाज हो। हिमाचल हाइकोर्ट ने अक्टूबर 2025 में यत बात कही है। मंदिर का पैसा सरकार ले रही है, भगवान का पैसा पैसा सड़क सड़क बनाने के लिए नहीं है।उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि दूसरे मजहबों के कई देश है, जिनमें सब एक हैं, लेकिन हिंदुओं का एक देश है और वो भी बंटे हुए हैं

भगवान शिव को धतूरा किया था अर्पित

गुरु केवल मार्ग नहीं दिखाते, वे वह दृष्टि देते हैं जिससे हम ईश्वर को देख सकें। मां शबरी का अपने गुरु मतंग ऋषि के प्रति अटूट विश्वास ही था, जिसने राम को उनकी कुटिया तक खींच लाया। श्रवण, सत्संग और जप का प्रभाव क्या होता है, माता शबरी को भगवान श्रीराम ने बताया था, श्रीराम ने माता शबरी से कहा कि मैं परीक्षा से नहीं मिलता मैं तो भरोसा और प्रतीक्षा से प्राप्त होता हूं। कहा जाता है कि जब ऋषि मतंग मृत्यु के निकट थे, तब वृद्धावस्था पा चुकीं शबरी ने उनसे पूछा कि आप जैसा ज्ञान, वैराग्य और प्रभु के दर्शन मुझे कैसे प्राप्त होंगे।

ऋषि मतंग ने देह त्यागने से ठीक पहले उन्हें वरदान दिया कि निःस्वार्थ सेवा तुम्हें न केवल प्रभु के दर्शन मिलेंगे, बल्कि भगवान राम खुद चलकर तुम्हारे पास आएंगे। तब से शबरी भगवान राम के आगमन की प्रतीक्षा में लग गयी थीं, उसके उपरांत उसकी मनोकामना पूरी हुई। यह बात शिवमहापुराण कथा के दौरान कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने कही। उन्होंने फुलेरा दूज को लेकर कहा कि आज ही के दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को धतूरा अर्पित किया था। (MP News)

Published on:
20 Feb 2026 05:25 am