बुदनी. भोपाल में 24-25 फरवरी को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में बुदनी के खिलौना निवेशों को खूब आकर्षित करेंगे। इन्वेस्टर्स के सामने समिट में एक जिला, एक उत्पाद के तहत चयनित बुदनी के खिलौनों की ब्रॉडिंग की जाएगी। दुधाई की लकड़ी से बने खिलौनों की इन्वेस्टर्स समिट परिसर में प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसके लिए […]
बुदनी. भोपाल में 24-25 फरवरी को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में बुदनी के खिलौना निवेशों को खूब आकर्षित करेंगे। इन्वेस्टर्स के सामने समिट में एक जिला, एक उत्पाद के तहत चयनित बुदनी के खिलौनों की ब्रॉडिंग की जाएगी। दुधाई की लकड़ी से बने खिलौनों की इन्वेस्टर्स समिट परिसर में प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसके लिए 23 फरवरी को बुदनी से कारीगर भोपाल पहुंच जाएंगे।
जिले में दुधाई की लकड़ी से बनने वाले हस्तशिल्प खिलौना अपनी अद्भुत कारीगरी, रंग और बनावट की वजह से अलग पहचान रखते हैं। बुदनी में बीते 200 साल से पारंपरिक रूप से लकड़ी के खिलौना बनाने का काम हो रहा है, यहां करीब 280 शिल्पकार हैं, जिनमें से करीब 120 परिवार का वन विभाग ने पंजीयन किया है, जिन्हें दुधाई की लकड़ी कम कीमत पर उपलबध कराई जाती है। सरकार बुदनी में 20 करोड़ रुपए की लागत से 14.88 एकड़ भूमि में खिलौना क्लस्टर का निर्माण कर रही है। बांसापुर क्षेत्र में 50 शेड बनाने का काम तेज गति से चल रहा है, यहां के शिल्पकारों का हस्तशिल्प विकास निगम में भी रजिस्ट्रेशन किया गया है, अभी करीब 180 शिल्पकार पंजीकृत हैं।
बुदनी के खिलौना दिल्ली, मुंबई में काफी पसंद किए जाते हैं। भोपाल के रानी कमलापति और नर्मदापुरम रेलवे स्टेशन पर खिलौने का स्टॉल भी लगा है। बुदनी के खिलौनों की एक खासियत यह है कि खिलौना निर्माण के लिए दुधाई लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। इसका रंग सफेद होता है और इसमें किसी तरह की गांठ और रेसे नहीं होते। पूरी लकड़ी एक जैसी होने के कारण खिलौने सुंदर और आकर्षक दिखते है। साथ ही यह लकड़ी मजबूत होती है, बच्चों द्वारा खेलते समय इसे दांतों से चबाने या मुह में लगाने से कोई नुकसान नहीं होता। इस लकड़ी में कई औषधिगुण भी हैं। दो साल पहले बुदनी में 15 दिवसीय टॉय फेस्टिवल भी मनाया गया। इस दौरान तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुदनी को टॉय कलस्टर के रूप में विकसित करने की घोषणा की, जिसके तहत बांसापुर में शेड निर्माण कार्य चल रहा है, मार्च 2025 तक निर्माण कार्य पूर्ण होने के आसार हैं।
काष्ठ शिल्पकार पीढ़ी दर पीढ़ी लकड़ी के खिलौने बनाते आ रहे हैं। अद्भुत काष्ठ कारीगरी, रंग, बनावट और आकर्षक आकार के इनकी देश में अलग पहचान है। सरकार बुदनी में बनने वाले खिलौने को जीआई टैग दिलाने का प्रयास भी कर रही है। साल 2021 में इसे ‘एक जिला एक उत्पाद’ में शामिल किया गया था। खिलौने विक्रय के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार एवं ऑनलाइन शापिंग के लिए आवश्यक नेटवर्क, प्लेटफार्म तैयार कर के सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलौना निर्माताकंपनियों से भी संपर्क कर रही है। इन्वेस्टर्स समिट में स्टॉल लगाने के लिए बुदनी से करीब 25 शिल्पकार भोपाल जाएंगे।