सीहोर

रिश्वत लेने वाले उपपंजीयक और क्लर्क को चार-चार साल का कारावास

उपपंजीयक को 15 हजार और क्लर्क पर पांच हजार रुपए अर्थदंड की भी सुनाई सजा

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Aug 02, 2018
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सीहोर। विशेष न्यायाधीश अनीता वाजपेयी ने रिश्वत लेने के मामले में दोषी पाते हुए कार्यालय उप पंजीयक राजस्व नसरुल्लागंज के उप पंजीयक रमेशचंद्र सेन और कार्यालय के ही क्लर्क धर्मेन्द्र जायसवाल को चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उप पंजीयक पर 15 हजार रुपए और क्लर्क पर पांच हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया है।

अभियोजन के अनुसार 5 मार्च 2014 को आवेदक गजानंद जाट ने पुलिस अधीक्षक विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त कार्यालय भोपाल संभाग को इस यह शिकायत की उसे उप पंजीयक कार्यालय नसरुल्लागंज से भारमुक्त प्रमाण पत्र के संबंध में तीन हजार रुपए की रिश्वत उप पंजीयक रमेशचंद्र सेन द्वारा मांगी जा रही है।

लोकायुक्त ने रंगें हाथ आरोपी की पकड़ा

शिकायत के आधार पर लोकायुक्त कार्यालय में निरीक्षक मनोज मिश्रा द्वारा ट्रेप दल टीम का गठन किया गया एवं 19 मार्च 2014 को फरियादी ने उप पंजीयक राजस्व कार्यालय में उपपंजीयक रमेशचंद्र सेन को रिश्वत की राशि दी गई। जिस पर लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा गया।

इसके साथ ही आरोपी रमेश चंद्र सेन ने रिश्वत राशि के रुपए क्लर्क धर्मेन्द्र जायसवाल को देना बताए जाने पर रिश्वत राशि क्लर्क की टेबल की ड्राज से जब्त की गई। जांच उपरांत आरोपीगण के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

अभियोजन की जिला अभियोजन अधिकारी निर्मला चौधरी तथा सहयोग सहायक जिला अभियोजन अधिकारी रेखा यादव ने बताया कि मामले में विशेष न्यायाधीश ने उपपंजीयक आरोपी रमेश चन्द्र सेन को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 में 4 वर्ष के सश्रम कारावास एवं पांच हजार रुपए अर्थदंड एवं धारा 13 (1) डी पठित 13(2) में 4 वर्ष का सश्रम कारवास व दस हजार रुपए अर्थदंड से दण्डित किया एवं आरोपी धर्मेन्द्र जायसवाल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (1) पठित 13(2) सहपठित धारा 107 भादवि में 4 वर्ष का सश्रम कारवास व पांच हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया।

Published on:
02 Aug 2018 10:39 am
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