सीहोर

सीहोर में देखने मिल रहे पचमढ़ी जैसे नजारे, गिरते जलप्रपात को देखने सैलानियों का लग रहा मेला

सीहोर में देखने मिल रहे पचमढ़ी जैसे नजारे, गिरते जलप्रपात को देखने सैलानियों का लग रहा मेला

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Aug 23, 2018
सीहोर में देखने मिल रहे पचमढ़ी जैसे नजारे, गिरते जलप्रपात को देखने सैलानियों का लग रहा मेला

सीहोर/इछावर। मिनी पचमढ़ी के रूप में पहचान बचा चुका कालियादेव देव इन दिनों लोगों को बर्वस ही अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इछावर तहसील मुख्यालय से 25 किमी दूर स्थित कालियादेव बारिश के मौसम में लोगों को काफी लुभा रहा है। 40 फीट की ऊंचाई से गिरते झरने का लुत्फ उठाने जिले के अलावा अन्य जिलों से हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

इछावर मुख्यालय से उत्तरी दिशा में सीप नदी पर स्थित कालिया देव का झरना इस समय अपने पूरे शबाब पर है। जोरदार बारिश और प्राकृतिक सौन्दर्यकरण के कारण कालिया देव मिनी पचमढ़ी के नाम से प्रसिद्धी पा चुका है। घने सागौन के जंगल के बीच से निकली सीप नदी और यहां की हरी भरी पहाडिय़ा लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इससे बारिश के दिनों में यहां बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने आते हैं। यहां की खासियत यह है कि यहां 40 फीट ऊपर से करीब बीस फीट की चौड़ाई के साथ झरना कुंड में गिरता है। पानी की गहराई कितनी है, इस बात का अधिकृत रूप से प्रमाण नहीं मिला है।

कई जिलों के आते हैं लोग
कालियादेव के प्राकृतिक नजारे को देखने जिले के अलावा रायसेन, उज्जैन, इंदौर, शाजापुर, भोपाल सहित अनेक जिलों के लोग प्रतिदिन यहां पहुंच रहे हैं। रोजाना यहां पर एक हजार से अधिक लोग पहुंच रहे हैं। कालिया देव धाम के आसपास भीषण जंगल भी है। ऊंची ऊंची पहाडिय़ां कहीं पहाडिय़ों पर देवता स्थित है जिनको लोग दर्शन के लिए भीषण जंगल में पहाडिय़ों पर चढ़ जाते हैं।

यहां देखने लायक स्थान
नादान से 4 किमी दूर कालिया देव का मंदिर और झरना है। पास की पहाड़ी पर मंडल गड़ स्थित है, जहां रानी रूपमती का ननिहाल था। आज भी यहां पुरानी बस्ती के अवशेष देखे जाते हैं। इसके पास की बगवाई माता का मंदिर भी यहां मौजूद है। वहीं नादान से 3 किमी दूर जामन भड़क नामक स्थान है।

Updated on:
23 Aug 2018 01:20 pm
Published on:
23 Aug 2018 11:26 am
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