सीहोर में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चल रहे वयस्क बीसीजी टीकाकरण अभियान को झटका लगा है। कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट की अफवाहों के कारण लोग टीबी का टीका लगवाने से कतरा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को 5 लाख टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें अभी तक 40 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो […]
सीहोर में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चल रहे वयस्क बीसीजी टीकाकरण अभियान को झटका लगा है। कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट की अफवाहों के कारण लोग टीबी का टीका लगवाने से कतरा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को 5 लाख टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें अभी तक 40 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो पाया है।
मार्च 2024 में शुरू हुए इस अभियान में 18 वर्ष से अधिक आयु के छह श्रेणियों के लोगों को टीका लगाया जा रहा है। इनमें टीबी मरीज, उनके संपर्क में रहने वाले व्यक्ति, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, कुपोषित वयस्क, धूम्रपान करने वाले और मधुमेह के मरीज शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों के मन में बैठे डर को दूर करना है। स्वास्थ्य कर्मी लोगों को टीके के फायदे समझा-समझाकर थक गए हैं, लेकिन लोग आंगनबाड़ियों में टीका लगवाने नहीं पहुंच रहे हैं। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी टीका लगवाने से बच रहे हैं।
कोविड टीकाकरण के दौरान जिस तरह का सहयोग अन्य विभागों से मिला था, वैसा समर्थन इस अभियान को नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि 11 महीने बीत जाने के बाद भी लक्ष्य से काफी दूर है और हजारों डोज अभी भी बची हुई हैं।