471 किसानों ने 14 हजार क्विंटल गेहूं बेचा, एक एकड़ पर 16 क्विंटल गेहूं खरीदी से हुए परेशान
सीहोर. समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के पहले दिन 160 केन्द्रों में से 58 केन्द्रों पर ही खरीदी का श्रीगणेश हो सका। पहले दिन 471 किसानों से करीब 14 हजार 149 क्विंटल गेहूं की खरीदी गई। समर्थन मूल्य केन्द्र पर किसानों से इस बार एक एकड़ पर 16 क्विंटल उपज के मान से खरीदी की जा रही है। इससे किसान परेशान हैं।
किसानों का कहना है कि पिछले साल एक एकड़ पर 20 क्विंटल उपज ली गई थी। मंगलवार को जिले में समर्थन मूल्य केन्द्र पर किसान का सम्मान कर खरीदी का श्री गणेश किया गया। पहले दिन जिले के 160 केन्द्रों में से 58 केन्द्रों पर ही खरीदी शुरू हो सकी।
बुदनी, नसरुल्लागंज क्षेत्र में गेहूं की उपज देरी से आने के कारण इन स्थानों पर एक भी केन्द्र पर गेहूं की खरीदी नहीं हो सकी। जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी शैलेष शर्मा ने बताया कि पहले दिन 471 किसानों ने कुल 14 हजार 149 क्विंटल गेहूं विक्रय किया।
दो हजार रुपए क्विंटल खरीदी का नहीं आया आदेश
किसान से समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है, लेकिन अभी दो हजार रुपए प्रति क्विंटल खरीदी का आदेश नहीं आया है। किसानों से अभी १७३५ रुपए क्विंटल के हिसाब से ही उपज ली जा रही है। किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी का खुलासा नहीं होने पर किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
इस बार किसानों के सामने खरीदी को लेकर दो समस्या आन खड़ी हुई है। पहली पिछले साल एक एकड़ पर २० क्विंटल खरीदी की गई थी, लेकिन इस बार १६ क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से ली जा रही है। किसान राजकुमार खत्री ने कहा इससे किसान परेशान हैं।
उनका कहना है कि अधिक उपज लाने पर उन्हें दूसरी बही लाने का कहा जा रहा है। वहीं इस संबंध में जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी का कहना है कि एक हैक्टेयर पर ४४ क्विंटल गेहूं की उपज के मान से किसानों से उपज ली जा रही है।
गेहूं के दाम कम होने पर किसानों ने किया हंगामा, 15 मिनट तक रुकी नीलामी
नसरुल्लागंज। कृषि उपज मंडी में अपनी उपज बेचने आए किसानों ने कम बोली लगने पर हंगामा कर दिया। इसके चलते 15 मिनट तक नीलामी रुकी रही। गेहूं के खरीदी पर व्यापारियों द्वारा 1650 रुपए की बोली लगाई गई, जबकि पहले 1750 गेहूं मंडी में बिक रहा था।
100 रुपए की मंदी आने के कारण किसानों ने हंगामा कर दिया। बाद में मंडी प्रबंधन द्वारा अलाउंस कराया गया कि किसान को अगर कम दाम में माल नहीं बेचना है तो वह माल बेचने की जल्दी न करें और सोसायटी में सरकारी भाव में माल बेच सकता है। किसान अपनी मर्जी से माल बेचने के लिए स्वतंत्र हैं।