किसानों के लिए नहीं है कोई सुविधा, शेड व मण्डी परिसर असुरक्षित, आए दिन लगता है जाम
किसानों के लिए नहीं है कोई सुविधा, शेड व मण्डी परिसर असुरक्षित, आए दिन लगता है जाम
शहडोल. प्रतिवर्ष 1 करोड़ से ज्यादा की आय देने वाली कृषि उपजमण्डी अव्यवस्था और अनदेखी का शिकार है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। पिछले 2018 के बाद से यहां मण्डी चुनाव न होने की वजह से किसान प्रतिनिधित्व विहीन है। किसानों की आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। मण्डी की 1.45 हेक्टेयर भूमि सिमटकर आधी रह गई है। दुकानें जीर्णशीर्ण हो चुकी है। परिसर के चारो तरफ अतिक्रमण व बेजा कब्जा है। नगर पालिका की टंकी होने की वजह से कोई निर्माण कार्य कराना भी मुश्किल हो रहा है। कृषि उपजमंडी का न व्यवस्थित स्ट्रक्चर है और न ही किसानों के लिए समुचित सुविधा।
विभागीय अधिकारियों की माने तो कृषि उपजमण्डी के लिए 15 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। पूर्व में हर्री के समीप स्थल चयन किया गया था लेकिन 10 एकड़ भूमि ही उपलब्ध हो पाई थी। इसके बाद विचारपुर में स्थल चयन किया गया है। भूमि आवंटन के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद आगे की प्रक्रिया होगी।
कृषि उपजमण्डी में दुकान, गोदाम व दो शेड के साथ कार्यालय भवन है। पर्याप्त स्थान के अभाव में किसानों के लिए यह उपयुक्त नहीं है। कृषि उपज मण्डी पहुंचने वाले किसानों की उपज नीलामी के लिए उपयुक्त स्थल नहीं है, परिसर के बाहर खुले में शेड बना हुआ है, जहां किसानों का अनाज पूर्णरूप से सुरक्षित नहीं है। किसानों की उपज तुलाई के लिए समुचित व्यवस्था के अभाव में किसानों को पंजीयन कराने के बाद तौल कराने के लिए बुढ़ार रोड स्थित धर्मकांटा जाना पड़ता है।
नगर के गंज स्थित कृषि उपज मण्डी पूरी तरह से असुरक्षित है। नगर पालिका की पानी टंकी होने की वजह से चारो तरफ पाइप लाइन फैली हैं, ऐसे में यहां निर्माण कार्य कराना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों की उपज खरीदने के लिए खुले में शेड बना हुआ है। कृषि उपजमण्डी की 63 से अधिक दुकानें हैं जो जीर्ण शीर्ण हो चुकी हैं। गोदाम में कृषकों की उपज के लिए उपयुक्त नहीं है। ऐसे किसानों से उपज खरीदने के बाद उसे सुरक्षित रखने की समुचित व्यवस्था का अभाव बना हुआ है।
कृषि उपज मण्डी में समिति का कार्यकाल 2018 में समाप्त हो गया है। इसके बाद से अब तक मण्डी चुनाव ही नहीं हुए हैं। ऐसे में कृषि उपजमण्डी में किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं है। समिति में तुलावटी, हम्माल, व्यापारी व किसानों के प्रतिनिधि सदस्य होते हैं। शासन स्तर से आदेश न होने से चुनाव अधर में लटका है। ऐसे में कृषि उपजमण्डी से जुड़े कृषकों व अन्य की आवाज उठाने वाला कोई नहीं है।
शहर के बीचो बीच होने की वजह से दिन में बड़े वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। यदि कोई वाहन पहुंच भी गया तो उसे खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं है। सब्जी मण्डी पहुंच मार्ग में होने की वजह से बड़े वाहनों के पहुंचते ही जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है। इन सभी समस्याओं से जूझते हुए किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते भी हैं तो कृषि उपज मण्डी में किसानों के लिए समुचित व्यवस्था उपलब्ध न होने की वजह से उन्हे परेशान होना पड़ रहा है। सब्जी मण्डी, फल मण्डी, चौपाटी सहित अन्य दुकानों को व्यवस्थित करने लगातार मांग उठ रही है, लेकिन अनाज मण्डी के लिए कोई आवाज नहीं उठा रहा है।