शहडोल

स्थानीय मामलों के जानकार नेता के हाथ में हो देश, राजनीति में उतरें युवा

पत्रिका महा अभियान पर युवाओं ने रखे बेबाक विचार
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Updated: 6 Apr 2018, 11:06 AM IST
Changemakers- Youth descend in politics, change politics

शहडोल. राजनीति को लेकर गलत अवधारणा है। हर कोई डॉक्टर बनना चाहता है, इंजीनियर बनना चाहता है लेकिन राजनीति में नहीं आना चाहता है। आजादी के वक्त भी युवाओं की अहम भूमिका थी। युवा कदम से कदम मिलाकर अपनी भूमिका निभाई थी, लेकिन पिछले तीस साल में गैप आ गया है। अब राजनीति जाति आधारित हो गई है, वोट आधारित हो गई है। राजनीति का असली मतलब है कि हम अपने देश को कैसे दूसरे देशों से आगे आएं लेकिन एक राजनीति पार्टी दूसरी राजनीति पार्टी के साथ राजनीति कर रही है, नीचा दिखाना चाहती है।

जब देश में राजनीति होगी तो कैसे विकास होगा। ऐसे ही विचार पत्रिका महाअभियान चेंज मेकर को लेकर आयोजित टॉक शो में इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने कही। इस दौरान अभिषेक साहू, आशुतोष दुबे, शिवांग पाण्डेय, रितिक कुमार, शिवम श्रीवास्तव ने भी बात रखी।

आजादी में कदम से कदम मिलाए थे युवा
छात्र उत्कर्ष नाथ गर्ग के मुताबिक जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले जन प्रतिनिधि भले ही पढ़े लिखे न हों लेकिन वह लोक विद्या से जुड़े व्यक्ति होने चाहिए। उनमें सामाजिक, तकनीकी व बौद्धिक समझ होनी चाहिए। लोक विद्या का ज्ञान रखने वाला जन प्रतिनिधि ही अच्छा नेतृत्व कर सकता है। कालेज व विश्वविद्यालय में नेतृत्व करने वाले ही आज देश का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीतिक पार्टियों एक दूसरे को नीचा दिखा रही हंै, ऐसे में बेहतर नेतृत्व कैसे होगा।

राजनीति में जातिवाद न हो
छात्र दीपक के मुताबिक जन सामान्य का नेतृत्व करने वाले को जातिवाद से हटकर समान भाव से सबके हक के लिए काम करना होगा तभी हम एक स्वच्छ व साफ सुथरी राजनीति की कल्पना कर सकते हैं। जातिवाद ने समाज को अलग-अलग तुकड़ो में बांट कर रख दिया है। इसके लिए राजनीति की जड़ों को पहले साफ-सुथरा करना होगा तभी हम आगे आने वाली राजनीति की सुचिता की बात कर सकते हैं।पत्रिका मुहिम सराहनीय है।

तीन वादों को जड़ से हटाने की जरूरत
युवा छात्र प्रखर तिवारी ने कहा युवाओं की राजनीति में सहभागिता आवश्यक है। १०-२० से शुरुआत होगी तो बदलाव अवश्य होगा। युवा जब सवाल पूंछेगे तभी परिवर्तन होगा यदि आप आगे नहीं आओगे तो आपको कुछ नहीं मिलेगा। जन प्रतिनिधि अच्छा काम करते तो युवाओं को बेरोजगारी का दंश नहीं झेलना पड़ता। जातिवाद, पूंजीवाद व परिवारवाद हावी है। इन तीनो वादों को पहले जड़ से समाप्त करने की आवश्यक्ता है।

राजनीति में भी पढ़ाई हो अनिवार्य
छात्र आशीष गौतम के मुताबिक राजनीति में शिक्षा को दर किनार कर जन प्रतिनिधियों को जिम्मेदारियां सौंप दी जा रही है। यहीं वजह है कि विकास के साथ राजनीतिक स्तर भी दिन व दिन नीचे गिरता जा रहा है। योग्यता के मापदण्ड तय होने चाहिए तभी हम एक अच्छे जन प्रतिनिधि की कल्पना कर सकते हैं। शिक्षा के साथ अनुभव लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने में कारगर होगा। नियमों की जानकारी नहीं है और उन्हे मंत्री बना दिया जाता है।

नेतृत्व में बदलाव बेहद जरूरी
लक्ष्मी सिंह ने कहा विकास के लिए पांच वर्ष का समय काफी होता है इतने में जिस पार्टी को जो विकास करना होता है वह कर लेती है। पांच वर्ष बाद नेतृत्व बदलना चाहिए। जिस जन प्रतिनिधि को जिस विभाग की जानकारी हो, अनुभव हो उसे ही जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। जन प्रतिनिधियों पर आंख बंद करके भरोसा नही करना चाहिए। सोच समझकर जन प्रतिनिधि का चयन करेंगे तभी स्वच्छ छबि वाले जन प्रतिनिधि का चयन कर सकते हैं।

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