शहडोल

आरक्षक ने देर रात खुद को मारी गोली; टूटा मोबाइल व अधूरी बातचीत छोड़ गया शिशिर

परिजनों ने कहा- पुलिस लाइन से ट्रांसफर के लिए कर रहा था प्रयासशहडोल. पुलिस लाइन में तैनात आरक्षक शिशिर सिंह की आत्महत्या के मामले ने विभाग और परिजनों को झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार को पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। जबलपुर से पहुंची मृतक की बहन गरिमा सिंह के बयानों […]

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Jan 24, 2026

परिजनों ने कहा- पुलिस लाइन से ट्रांसफर के लिए कर रहा था प्रयास
शहडोल. पुलिस लाइन में तैनात आरक्षक शिशिर सिंह की आत्महत्या के मामले ने विभाग और परिजनों को झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार को पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। जबलपुर से पहुंची मृतक की बहन गरिमा सिंह के बयानों और मौके से बरामद टूटे हुए मोबाइल ने इस घटनाक्रम में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो दिन पहले ही लिया था नया फोन

बहन गरिमा ने बताया कि शिशिर का पुराना फोन टूट गया था, जिसके कारण वह दोस्तों के फोन से घर बात करता था। बुधवार को ही उसने बहन से क्रेडिट कार्ड के जरिए पैसे लेकर नया मोबाइल खरीदा था। चर्चा है कि आत्महत्या से ठीक पहले शिशिर किसी से फोन पर बात कर रहा था। इसी दौरान उसने गुस्से या हताशा में अपना नया मोबाइल जमीन पर पटक कर तोड़ दिया और फिर सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। गोली गर्दन के पास से होकर सिर के पार निकल गई।

बाल आरक्षक से शुरू हुआ था सफर

शिशिर सिंह का पुलिस विभाग से नाता पुराना था। साल 2013 में उसे पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति (बाल आरक्षक) मिली थी। 2015 में 18 साल की उम्र पूरी होने पर वह नियमित आरक्षक बना। परिवार में मां और तीन बहनें हैं (दो विवाहित), जिनकी जिम्मेदारी शिशिर के कंधों पर थी। कोतवाली पुलिस ने मौके से सर्विस राइफल और क्षतिग्रस्त मोबाइल जब्त कर लिया है। पुलिस अब मोबाइल डेटा रिकवर करने की कोशिश कर रही है ताकि यह पता चल सके कि आखिरी कॉल किसके साथ था और मोबाइल पटकने की नौबत क्यों आई। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आत्महत्या के कारणों का पता चल पाएगा।

5 मिनट बाद कॉल करने का वादा… और फिर आई मौत की खबर

घटना की रात शिशिर 12 से 3 बजे की शिफ्ट में क्वार्टर ड्यूटी पर तैनात था। रात करीब 1.14 बजे उसने अपनी बड़ी बहन से फोन पर बात की। लगभग 6 मिनट की बातचीत के बाद शिशिर ने यह कहकर फोन रखा कि 5 मिनट बाद फिर कॉल करता हूं, लेकिन वह कॉल कभी नहीं आया। ठीक 40 मिनट बाद परिजनों को शिशिर की मौत की खबर मिली।

तनाव या सिस्टम से निराशा?

परिजनों के मुताबिक, शिशिर किसी पारिवारिक तनाव में नहीं था, लेकिन वह अपनी पोस्टिंग को लेकर असंतुष्ट था। वह पुलिस लाइन की ड्यूटी से ऊब चुका था और पिछले 3-4 महीनों से किसी थाने में या फिर कटनी या जबलपुर के आसपास ट्रांसफर के लिए प्रयास कर रहा था। बताया जा रहा है कि 5 महीने पहले ही उसे बुढ़ार थाने से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया था, जिससे वह खुश नहीं था।
इनका कहना
आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम का मुख्य कारण मानसिक तनाव होता है। सभी के जीवन में किसी न किसी बात को लेकर स्टे्रस होता है। इसे कुछ लोग बर्दाश्त कर लेते हैं और किसी में इसे बर्दाश्त करने की क्षमता बिल्किुल कम होती है और ऐसे लोग ही आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं।
डॉ मुकुंद चतुर्वेदी, मनोरोग विशेषज्ञ

आरक्षक की पुलिस लाइन में क्वार्टर ड्यूटी लगाई गई थी। प्रथम दृष्टया स्वयं को गोलीमारकर आत्महत्या किया जाना पाया गया है। मर्ग कायम कर आवश्यक जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य आएंगे उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अभिषेक दीवान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहडोल

Published on:
24 Jan 2026 11:58 am
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