
शहडोल- सर्दियां बीतने के बाद जैसे-जैसे सूरज की तपिश बढ़ रही है वैसे-वैसे राजनीतिक पारा भी चढऩे लगा है। अमूमन राजनीतिक रूप से शांत माने जाने वाले इलाके में भी राजनीतिक सरगर्मियां उबाल का रूप लेने लगीं हैं। विधायक अपनी जमीन बचाने के लिए गांव गली की खाक छान रहे हैं। सत्ताधारी विधायकों के पास तो रेवडिय़ों का पिटारा है, लेकिन जो विधायक विपक्ष के हैं उन्होंने आंदोलन की राह पकड़ ली है। उधर कांग्रेस के पर्यवेक्षक भी लगातार दौरे करके संगठन के कील-कांटे सही ठिकाने पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं की पूरी फौज जमीनी स्तर पर उतार दी है जो रोज लोगों के दरवाजों पर दस्तक दे रही है।
2018 में होना है मध्यप्रदेश में चुनाव
मध्यप्रदेश में 2018 में चुनाव होना है। इसको लेकर काफी समय से रस्साकशी शुरू हो गई थी, लेकिन ये सब चीजें काफी दबी हुई स्थिति में और निचले स्तर पर थीं, लेकिन अब गतिविधियां बढ़ गई हैं और राजनीतिक रस्साकशी अब सामने दिखने लगी है। जनता भी अब इस राजनीतिक सरगर्मी की तपिश महसूस करने लगी है।
प्रमिला और जयसिंह बांट रहे रेवडिय़ां
शहडोल जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं। यहां पर दो विधायक भारतीय जनता पार्टी के और एक विधायक कांग्रेस का है। तीनों सीटें आरक्षित होने की वजह से यहां के आदिवासी नेता पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं। सत्ताधारी विधायक जयसिंह नगर विधानसभा क्षेत्र से प्रमिला सिंह और जैतपुर विधानसभा सीट से जयसिंह मरावी हैं। ये दोनों विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र में काफी सक्रियता बढ़ाई हुई है। एक तरफ ये स्वयं भी दौरा कर रहे हैं दूसरी तरफ इन्हें सरकार में होने का भी फायदा मिल रहा है। प्रशासन के साथ मिलकर ये जनता को भी रेवडिय़ां बांट रहे हैं। जगह-जगह अन्तोदय मेलों का आयोजन किया जा रहा है। उनमें आदिवासी और जनता को सौगातें बांटीं जा रहीं हैं। सामूहिक विवाह भी इनके लिए अपनी राजनीतिक जमीन पुख्ता करने के लिए एक जरिया बने हुए हैं। दोनों सत्ताधारी विधायक अपना रसूख बचाने के लिए छोटे से छोटे कार्यक्रम में पहुंच रहे हैं।
रामपाल आंदोलन की राह पर
ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामपाल सिंह ने आंदोलन की राह पकड़ ली है। वे कई दिन से पानी की समस्या पर धरने पर बैठे हुए हैं। उन्होंने किसानों की नब्ज पर हाथ रखते हुए हिरवार जलाशय का मुद्दा उठा दिया है। जिस दिन से वे धरने पर बैठे हुए हैं उस दिन से प्रशासन भी चकरघिन्नी हो रहा है। एक तरफ तो अधिकारी भाजपा के विधायकों के लिए राजनीतिक प्लेटफॉर्म तैयार करने के एक के बाद एक कार्यक्रम आयोजित करवा रहे हैं, दूसरी तरफ कांग्रेसी विधायक का आंदोलन रोकने के लिए भी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। सरकारी मुलाजिम किसी तरह मान-मनौवल करके कांग्रेस विधायक का आंदोलन खत्म करवाना चाहते हैं, दूसरी तरफ कांग्रेसी विधायक अपनी मांगे पूरी करवाने के लिए आंदोलन को लंबा खींचते जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे इस आंदोलन को काफी जनसमर्थन भी मिलता जा रहा है, जिसकी वजह से भी प्रशासन और ब्यौहारी के भाजपा नेता परेशान हैं।
हिमाद्रि और नरेंद्र पर सबकी निगाहें
शहडोल, अनूपपुर और उमरिया क्षेत्र में इस युवा राजनीतिक जोड़ी पर भी लोगों की निगाहें हैं। दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग-अलग है लेकिन अब ये दोनों जीवन साथी हैं। लोगों की निगाहें हैं कि हिमाद्रि विधानसभा चुनाव में किस सीट से उतरेंगी। उतरेंगी कि नहीं भी उतरेंगी। यदि हिमाद्रि विधानसभा चुनाव लड़तीं हैं तो नरेंद्र की क्या भूमिका होगी। क्या नरेंद्र मरावी भी चुनाव लड़ेंगे। यदि नहीं लड़ेंगे तो क्या लोकसभा शहडोल से वे उतरेंगे। हालांकि इन दोनों युवा राजनेताओं पर सिर्फ कयासबाजी का ही दौर चल रहा है। पुख्ता तरीके से अभी कोई इरादे इन दोनों नेताओं ने जाहिर नहीं किए हैं। हालांकि नरेंद्र बार-बार एक ही बात दोहराते हैं कि पार्टी जो निर्णय करेगी, उन्हें वह मान्य होगा।
सांसद की निष्क्रियता बनी चर्चा का विषय
शहडोल से भाजपा के सांसद ज्ञान सिंह की निष्क्रियता इस क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ज्ञान सिंह पूरी तरह से अपने ही विधानसभा क्षेत्र में सिमटकर रह गए हैं। शहडोल और अनूपपुर उनके दौरे एकदम सीमित हैं अथवा महीनों से बंद हैं। सरकारी कार्यक्रमों में भी उनकी शिरकत न के बराबर है। इस बात को लेकर शहडोल और अनूपपुर की जनता उनसे काफी नाराज है। हालांकि भाजपा के कई नेताओं का कहना है कि ज्ञान सिंह सांसद का चुनाव लडऩा ही नहीं चाहते, इसलिए वे निष्क्रिय हैं। हालांकि उनका मानना है कि सांसद के रवैये से भाजपा को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
गोंगपा और दूसरे नेता भी हुए सक्रिय
आदिवासी इलाकों में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की अच्छीखासी धमक देखी जा रही है। इसके चलते भाजपा और कांग्रेस नेताओं को पसीना आ रहा है। दूसरी तरफ जयसिंहनगर विधानसभा सीट से टिकट को लेकर भाजपा के कई नेता अपनी गोटियां बैठाने में लगे हुए हैं। इनमें जिला पंचायत अध्यक्ष नरेंद्र सिंह मरावी, जैतपुर विधायक जयसिंह मरावी के भी सक्रिय होने की चर्चाएं सामने आ रहीं हैं। इसको लेकर भी काफी राजनीतिक रस्साकशी चल रही है। उधर ब्यौहारी में गोंगपा के युवा नेता के सक्रिय होने की वजह से कांग्रेस और भाजपा को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है, जिससे वहां पर भी चुनाव से काफी पहले ही सरगर्मियां बढ़ गईं हैं।