शहडोल

इस महाविद्यालय में अतिथि विद्वानों ने जड़ा ताला, कक्षाओं का किया बहिष्कार

जानिए क्या है कारण ?
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Updated: 12 Feb 2018, 2:25 PM IST
In this college, the guests, the teacher locked the gate

शहडोल- जिले के शासकीय कन्या महाविद्यालय में अतिथि शिक्षकों ने कक्षाओं के बहिष्कार के साथ-साथ तालाबंदी कर दी है। अतिथि विद्वानों ने ये बहिष्कार भोपाल में महिला अतिथियों द्वारा मुंडन कराने के शोक और समर्थन में किया है।

गौरतलब है कि कर्मचारियों के अलग- अलग कैडर की मांगों को लेकर राजधानी में विरोध प्रदर्शन करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। महिला अध्यापकों के बाद कॉलेजों में कार्यरत महिला अतिथि विद्वानों ने भी मुंडन करवाकर गुस्से का इजहार किया। ये शिक्षक लंबे समय से अध्यापन कार्य का मोर्चा संभालने वाले अतिथि विद्वान हैं। नीलम पार्क में रविवार को महिला अतिथि विद्वान डॉक्टर पार्वती व्याघ्रे सहित करीब एक दर्जन परुष अतिथि विद्वानों ने भी मुंडन कराया।

पार्वती को देख सबकी आंखे छलक पड़ीं और चारो और सन्नाटा फैल गया। विदिशा जिले की गंजबासौदा निवासी पार्वती रायसेन जिले के शासकीय उदयपुरा महाविद्यालय में ङ्क्षहदी विषय पढ़ाती हैं। इनका कहना है कि अगर सरकार शिक्षकों की बात मुंडन कराने से ही सुनती हैं तो यही सही। लेकिन अब आगे से कोई भी अपना शोषण नहीं होने देगा।

अतिथि विद्वान महासंघ के बैनर तले प्रदेश भर से आए ये कर्मचारी नियमित करने और पीएससी के जरिए की जा रही असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती निरस्त करने की मांग को लेकर नीलम पार्क में शनिवार से धरने पर डटे हैं। शनिवार को इन प्रदर्शनकारियों राहगीरों के ***** पॉलिश कर विरोध जताया था। महिलाओं के अलावा कई पुरुष अतिथि विद्वानों ने भी सामूहिक मुंडन कराया।

ये है मांग
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती निरस्त कर अतिथि विद्वानों को सीधे नियमित करने और यूजीसी पे-स्केल पर संविदा तौर पर नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं। इनका कहना है कि अभी ये मांग नहीं मानी गई तो ग्वालियर स्थित उच्च शिक्षामंत्री जयभान सिंह पवैया के निवास का 20-21 फरवरी में घेराव कर मुंडन कराएंगे। इसके बाद ये आंदोलन दिल्ली में भी किया जाएगा।


- उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्त अतिथि विद्वानों को एक दिन में 275 रुपए प्रति पीरियड की दर से अधिकत 827 रुपए मानदेय का भुगतान होता है।
- जनभागीदारी समिति से कॉलेजों में नियुक्त अतिथि विद्वानों को अलग-अलग मानदेय मिलता है। जिसमें 12 हजार से आठ-हजार रुपए महीने फिक्स मानदेय भी दिया जाता है।
- ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के तौर पर कार्य करने वाले अतिथि विद्वानों को प्रतिदिन का सिर्फ ५८० रुपए भुगतान किया जाता है।

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