शहडोल

प्रदूषण से जहरीला हुआ झूला पुल तालाब का पानी, सैकड़ों मछलियों की गई जान

प्रशासनिक अनदेखी और चौपाटी की गंदगी ने घोला पानी में जहर, मत्स्य विभाग और नगर पालिका सोए रहेशहडोल. शहर की पहचान और हृदय स्थल कहा जाने वाला झूला पुल तालाब अब जलीय जीवों के लिए मौत का जाल बन चुका है। बीती रात तालाब की सतह पर उतराती सैकड़ों मृत मछलियों ने नगर के पारिस्थितिकी […]

2 min read
Feb 05, 2026

प्रशासनिक अनदेखी और चौपाटी की गंदगी ने घोला पानी में जहर, मत्स्य विभाग और नगर पालिका सोए रहे
शहडोल. शहर की पहचान और हृदय स्थल कहा जाने वाला झूला पुल तालाब अब जलीय जीवों के लिए मौत का जाल बन चुका है। बीती रात तालाब की सतह पर उतराती सैकड़ों मृत मछलियों ने नगर के पारिस्थितिकी तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। पानी में घुलते जहर और प्रशासन की लापरवाही के कारण मछलियां तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अब भी फाइल देखने और पत्राचार तक सीमित हैं। तालाब की सफाई कब हुई थी, इसकी जानकारी नगरपालिका को भी नहीं है।

शराबियों का अड्डा व गंदगी का अंबार

तालाब की दुर्दशा केवल प्रदूषण तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम ढलते ही यहां असामाजिक तत्वों और शराबियों का जमावड़ा लग जाता है। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें, प्लास्टिक डिस्पोजल और कचरे के ढेर नगरपालिका की सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। दुर्गंध इतनी तीव्र है कि राहगीरों का वहां से गुजरना दूभर हो गया है, जिससे अब महामारी फैलने का भय सता रहा है।

चौपाटी और अस्पतालों की गंदगी

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि तालाब के दूषित होने के दो प्रमुख कारण हैं। तालाब में कई निजी अस्पतालों का अपशिष्ट सीधे पानी में बहाया जा रहा है। खाने-पीने की दुकानों और चौपाटी क्षेत्र की गंदगी बिना किसी रोक-टोक के तालाब में डाली जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल वेस्ट और प्लास्टिक कचरे के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर गिर गया है, जिससे मछलियों का दम घुट गया।

विभागों की कुंभकर्णी नींद

हैरानी की बात यह है कि घटना के कई घंटों बाद भी मत्स्य विभाग को इसकी सुध नहीं थी। न तो मरी हुई मछलियों को निकालने की व्यवस्था की गई और न ही पानी के नमूनों की तत्काल जांच कराई गई।
इनका कहना
तालाब की सफाई पिछली बार कब हुई थी, इसकी फाइल देखनी पड़ेगी। मछलियां मरने की सूचना मिली है। हमने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पानी की जांच के लिए पत्र लिखा है।
एमएस तोमर, प्रभारी सीएमओ, नगरपालिका

मेडिकल वेस्ट जलीय जीवन के लिए साइलेंट किलर है। यदि समय रहते तालाब की सफाई नहीं हुई, तो पूरा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो जाएगा।
प्रदीप श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त मत्स्य अधिकारी

Published on:
05 Feb 2026 11:46 am
Also Read
View All

अगली खबर