सुष्मा स्वराज को सुनने उमड़ती थी भीड़
शहडोल. कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले संसदीय क्षेत्र शहडोल में ही भाजपा की प्रखर और ओजस्वी वक्ता सुष्मा स्वराज ने ही सेंध लगाई थी। और एक साल के अंतराल में दो बार हुए लोक सभा चुनाव में पार्टी हाई कमान ने उन्हें भाजपा को जीत दिलाने के लिए चुनाव प्रचार के लिए नाम प्रस्तावित किया और वर्ष 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में वह चुनाव प्रचार करने आई और दोनों बार भाजपा को जीत मिली। सुष्मा स्वराज की आकस्मिक मौत के बाद शहडोल में भी भाजपा नेताओं के बीच शोक की लहर देखी जा रही है। भारत की पूर्व विदेश मंत्री और प्रखर वक्ता वरिष्ठ भाजपा नेत्री सुष्मा स्वराज का ओजस्वी भाषण सुनने देश और प्रदेश ही नहीं शहडोल की जनता भी उन्हें सुनने अपने कदम नहीं रोक पाती थी। सुष्मा स्वराज का विराट नगरी और शहडोल जिले से विशेष लगाव रहा और वह नगर सहित जिले के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं से लगाव और जुड़ाव होने की वजह से वह नेताओं के घर पहुंचकर सहजता से उनका आमंत्रण स्वीकार कर उनके निवास पर जाकर भोजन भी लिया। शुष्मा स्वराज का दो बार शहडोल आगमन हुआ और वह पहली बार 23 फरवरी 1998 को नगर के गांधी चौक में भाजपा प्रत्याशी ज्ञान सिंह के चुनावी सभा को संबधित की थीं उस दौरान उनका भाषण सुनने ऐसा जन सैलाब उमड़ा कि सभा स्थल पर भीड़ के लिए खड़े होने तक की जगह नहीं थी, और लोग खड़े होकर उनका भाषण सुनने के लिए आतुर दिखाई दिए। शुष्मा स्वराज 1998 में ज्ञान सिंह का प्रचार करने आई थीं और उस समय कांगे्रस के कद्दावर नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री दलबीर सिंह को पराजय का सामना करना पड़ा था। इसी तरह दूसरी बार वह 13 सितंबर 1999 को नगर के रघुराज हायरसेकंडरी स्कूल के सामने स्थित चुनावी सभा को सम्बोधित किया था और उस दौरान भी ऐसा अपार जन समूह उमड़ा कि कांग्रेस प्रत्याशी छग के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को भाजपा के प्रत्याशी स्वर्गीय दलपत सिंह से हार का सामना करना पड़ा था। शुष्मा स्वराज जिले के भाजपा नेता पूर्व विधायक स्वर्गीय लल्लू सिंह, दलपत सिंह, ज्ञान सिंह, पूर्व विधायक छोटेलाल सरावगी, संजय मित्तल, कैलाश तिवारी, अनिल गुप्ता, अमिता चपरा, अरुण गुप्ता सहित नगर के अन्य भाजपा नेताओं से व्यक्तिगत तौर पर जुड़ी रहीं। अपने दौरे के दौरान वह भाजपा नेता संजय मित्तल के घर पहुंचकर उनके यहां भोजन ग्रहण भी किया था।