बांध के बाद सूख जाती है मुडऩा, किसानों के खेत रहते हैं प्यासे
शहडोल. उद्गम स्थल पर अथाह पानी का स्त्रोत होने के बाद भी जीवनदायिनी मुडऩा नदी की धारा टूट रही है और भारी बारिश के सीजन में नदी सूखने की कगार पर है। जबकि इस नदी पर बने डेम में लबालब पानी भरा हुआ है, मगर आगे की जलधारा टूट चुकी है। यही वजह है कि बारिश में मुडऩा नदी में मिलने वाले नदी-नालों के पानी से जलधारा तो बहती है, लेकिन नदी का उद्गम स्थल के मुख्य जलस्त्रोत से नाता टूट चुका है और इसके बाद भी मुडऩा नदी के उद्गम स्थल के करीब ही करोड़ों की लागत से एक और बांध का निर्माण कराया जा रहा है। गौरतलब है कि जिला मुख्यालय करीब दस किलोमीटर दूर स्थित ग्राम केलमनिया के जंगल से निकलकर क्षीर सागर के समीप सोन नदी में मिलती है। लगभग 50 किलोमीटर लंबी इस नदी की जलधारा उद्गम स्थल से करीब दो किलोमीटर स्थित केलमनिया बांध के बाद समाप्त हो जाती है। इस प्रकार इस नदी का अस्तित्व ही समाप्त जैसा हो रहा है।
पहाड़ों के बीच से निकलती है मुडऩा
जानकारों ने बताया है कि ग्राम केल्मनिया से करीब दो किलोमीटर दूर पहना पहाड़ के बीच से मुडऩा नदी निकलती है। मुडऩा के उद्गम स्थल पर एक कुण्ड जैसा बना हुआ है, जो बहुत ज्यादा गहरा है और उससे लगातार पानी निकलता रहता है। इसके अलावा मुडऩा में दो और जलस्त्रोत मिलते है। जिसमें बासापानी पहाड़ के कुएं का पानी और क्षीर पानी शामिल है। इस प्रकार तीन जलस्त्रोत से मिलकर मुडऩा नदी आगे बहती है। यहां पर शुद्ध पानी का बहाव होता है और आसपास के ग्रामीण व उनके मवेशी नदी के पानी पर निर्भर रहते हैं।
तट पर जड़ी-बूटियों का अंबार
ग्राम केलमनिया निवासी 52 वर्षीय गेंदलाल यादव ने बताया कि मुडऩा के तट पर जड़ी-बूटियों का अंबार है और जानकार लोग उपचार के लिए जड़ी बूटी तलाशने आते हैं। जड़ी बूटी को कुछ लोग तो अपना व अपने परिवार का जीवन यापन का साधन ही बना लिया है।
कभी नहीं सूखती मुडऩा
ग्राम टिहकी जैतहरी निवासी अघनू बैगा ने बताया कि मुडऩा नदी का पानी कभी नहीं सूखता था, लेकिन जब से डेम बना है तब से उसके आगे मुडऩा नदी में पानी बहना कम हो गया है और गर्मी में वहां पानी सूख जाता है। ऐसे में आसपास के ग्रामीणों के खेत प्यासे रह जाते हैं।
मुडऩा के जल पर आश्रित है ग्रामीण
ग्राम केलमनिया निवासी 50 वर्षीय डूमरू बैगा ने बताया कि आसपास के ग्राम बंधवा, जुगवारी, पठरा, भर्राटोला, बैगान टोला, रठियान टोला के लोगों को बांध का पानी मिल जाता है, मगर ग्राम पचगांव, झगरहा, चंदनिया,दूधी व पुरनिहा के लोग मुडऩा के जल पर ही आश्रित है।
पचगांव में बनेगा एक और डेम
जल संसाधन विभाग द्वारा समीपी ग्राम पचगांव में १९ करोड़ रुपए की लागत से एक डेम बनाने की कार्य योजना है। इस योजना को प्रशासकीय स्वीकृति भी मिल चुकी है। विभाग के कार्यपालन यंत्री डी आर आंकरे ने इस डेम से शहडोल पूरे नगर की जलआपूर्ति दुरुस्त होने और ग्राम पचगांव, मझौली, ङ्क्षसदुरी, विचारपुर व वासिनी के करीब ४६० हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की एक बेहतर सुविधा मिलने का दावा किया है। विभाग के जानकारों का यह भी कहना है कि बांध में सीपेज ड्रेन फिल्टर के माध्यम से नदी में पानी बहाया जाता है, मगर पानी का प्रवाह नदी के प्रवाह से काफी कम रहता है।