जानिए कौन है ये शख्सियत...
शहडोल- जिले का सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अपने 50 साल पूरे कर चुका है। इस अवसर पर स्वर्ण जयंती महोत्सव का आयोजन हो रहा है। लेकिन क्या आपको पता है मध्यप्रदेश में आज जो ये सरस्वती स्कूल का पूरा जाल फैला हुआ है, इसके जनक कौन हैं, मध्यप्रदेश में सरस्वती शिशु मंदिर के जनक माने जाते हैं रोशनलाल सक्सेना, जिन्होंने प्रदेश में जगह-जगह शिक्षा की अलख जगाई। और अपनी कड़ी मेहनत और संघर्षों के बल पर आज पूरे प्रदेश में स्कूलों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर दिया।
प्रदेश में ऐसे खुला पहला सरस्वती स्कूल
रोशनलाल सक्सेना जी रीवा कॉलेज में रहते हुए सुदर्शन जी की आज्ञा से 12 फरवरी गुरुवार बसंत पंचमी के दिन 1959 में रीवा के बैजनाथ रामसहाय अग्रवाल धर्मशाला के कमरा नंबर-74 में प्रदेश के पहले सरस्वती शिशु मंदिर की शुरुआत की। स्कूल को शुरू तो कर दिया लेकिन इसे स्थापित करने के लिए इन्होंने बहुत संघर्ष किया, कहा जाता है कि इस दौरान रोशलाल जी पहले कॉलेज जाते थे और फिर वहां से आकर बच्चों को अपनी साइकिल से घर-घर पहुंचाते थे। रोशनलाल जी रीवा विभाग के विभाग प्रचारक के साथ-साथ सरस्वती शिशु मंदिर योजना की शुरुआत की।
नहीं डरे नक्सलियों से वहां भी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा योगदान
जब मध्यप्रदेश विभाजित नहीं था तब छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश एक में ही था उस दौर में दूरस्थ वनवासी अंचलों जैसे दंतेवाड़ा में हीरनार सरगुजा में कसेकेरा, डीपाडी, कोरिया में सरभोका रीवा में पिराही जैसे स्थानों में उन्होंने वनवासी शिक्षा के विकास के लिए बहुत प्रयास किया।
आवासीय विद्यालय में भी बड़ा योगदान
रोशनलाल जी ने मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में बहुत योगदान दिया है। मध्यप्रदेश में भाउरावजी देवरस के इच्छानुसार भोपाल के पास साढ़े तेरह किलोमीटर दूर केरवा बांध रोड पर ५७.८ एकड़ जमीन खरीदी गई जिसका भूमि पूजन 1987/88 में भाउरावजी देवरस के द्वारा संपन्न हुआ। उसी जगह पर कुछ हिस्सा बन जाने के बाद शारदा विहार आवासीय स्कूल की स्थापना सन 1995/96 में की गई। रोशनलाल जी के प्रयासों की बदौलत ही सतना में भी आवासीय विद्यापीठ की स्थापना हुई। इतना ही नहीं शहडोल विभाग में लज्जाराम जी तोमर के सपनों को साकार करते हुए अमरकंटक में वनवासी छात्रावास एवं योग केंन्द्र की आधारशिला रखी गई। ग्रामीण शिक्षा के विस्तार के लिए दिशादर्शी प्रकल्प देवरी सागर में विनायक राव जी सेंडे के संयोजकत्व में ग्वालियर राज माता विजय राजे सिंधिया के द्वारा उद्घाटन हुआ।
रोशनलाल जी के बारे में...
रोशनलाल जी रीवा जिले के मूल निवासी हैं। गणित एवं सांख्यिकी विषय से एमएससी हैं। कृषि महाविद्यालय रीवा टीकमगढ़ छतरपुर सीहोर में प्राध्यापक पद पर सेवाएं दी हैं। साढ़े दस साल लगातार पढ़ाने के बाद घर की आवश्यकता, छोटी बहन की शादी, एवं छोटे भाई का इंजीनियरिंग प्रशिक्षण के कारण 9 अक्टूबर 1964 को सीहोर कॉलेज से त्यागपत्र दे दिया ।
देवपुत्र बाल पत्रिका के प्रारंभ से वार्षिक, मासिक, अखिल भारतीय पत्रिका होने तक लगभग ३० से 35 साल तक लगातार संपादक रहे। शिक्षा के क्षेत्र में आज जो मध्यप्रदेश में सरस्वती शिशु मंदिर के माध्यम से जो कुछ भी विस्तार दिखाई दे रहा है। ये सभी इन्हीं की कल्पना की देन है। मौजूदा समय में रोशनलाल सक्सेना जी विद्या भारतीय मध्यक्षेत्र के संरक्षक, मार्गदर्शक हैं। और इसके साथ ही चारो प्रकल्पों नगरीय, ग्रामीण, वनवासी एवं उपेक्षित क्षेत्र की शिक्षा का मार्गदर्शन कर रहे हैं।