आवागमन के लिए नहीं है कोई व्यवस्था, बस संचालक करते हैं अभद्रता
शहडोल. नाम वापसी के एक दिन पहले तक दोनों ही राजनैतिक दल दावेदारों के बीच सामंजस्य नहीं बना पाए। भाजपा ने बुधवार की देर शाम दो निकायों के प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी लेकिन कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले है। मुख्यालय के वार्डों को लेकर अभी भी घमासान मचा हुआ है। भाजपा ने नगर के अधिकांश वार्डों में प्रत्याशी तय कर लिए हैं लेकिन कुछ वार्ड ऐसे हैं जिसे लेकर अभी भी ऊहा-पोह की स्थिति बनी हुई है। जिसके चलते बुधवार की देर शाम तक पार्टी किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाई है। गुरुवार को नाम वापसी का अंतिम दिन है कांग्रेस अंतिम दिन दोपहर तक अपनी सूची जारी कर देगी। इधर भाजपा में मुख्यालय की सीटों के लिए अभी भी मंथन का दौर चल रहा है। पहले समितियों को सूची देनी थी फिर गेंद जिला प्रभारी के पाले में चली गई। मंगलवार की देर रात तक समिति की सूची में जो नाम थे उन्हें लेकर मंथन भी हुआ इसके बाद भी स्थितियां स्पष्ट नहीं हो पाई। बुढ़ार व जयसिंहनगर नगरीय निकाय में होने वाले चुनाव के लिए कुल 577 नामांकन दाखिल किए गए थे। मंगलवार को स्क्रूटनी में 9 आवेदन रिजेक्टर हुए वहीं 13 आवेदन डबल पाए गए थे। गुरुवार को नाम वापसी का अंतिम दिन है। जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि तीनों निकायों के 69 वार्डों में कितने प्रत्याशी मैदान में है। प्रत्याशियों को प्रतीक चिन्ह भी आवंटित कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही प्रचार भी शुरू हो जाएगा।
बनाई जाए समुचित व्यवस्था
इजीनियरिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं का कहना है कि उनके कॉलेज आने-जाने के लिए समुचित व्यवस्था बनाई जाए। जिससे कि उन्हे आए दिन हो रही परेशानी से निजात मिल सके। दूर-दूर से वह पढने के लिए यहां आते है। समय पर साधन ने मिलने व बस संचालकों की मनमानी के चलते उन्हे काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
अब तक प्रबंधन भी नहीं बना पाया व्यवस्था
इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने लगभग दो माह पूर्व ही कॉलेज प्रबंधन को पत्र सौंपकर आवागमन की समुचित व्यवस्था बनाए जाने की मांग की थी। इसके साथ ही एक सप्ताह पूर्व भी उन्होंने समस्याओं से अवगत कराते हुए प्रबंधन से व्यवस्था की मांग की थी। जिस पर प्रबंधन ने यातायात डीएसपी को पत्राचार कर बस संचालकों को किराया निर्धारण व छात्र-छात्राओं के बसों से आवागमन की समुचित व्यवस्था की मांग की थी। जिसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अभी तक इसे लेकर न प्रबंधन व्यवस्था बना पाया और न यातायात पुलिस ने ही कोई कदम उठाया। जिसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।