शहडोल

गांव में सडक़, बिजली व पानी नहीं, सिर्फ मध्यान्ह भोजन खिलाने खोलते हैं स्कूल

ग्रामीणों ने कहा-मजबूरी है कहां पढऩे भेजे बच्चों को, भवन भी है जर्जर

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Sep 08, 2024

ग्रामीणों ने कहा-मजबूरी है कहां पढऩे भेजे बच्चों को, भवन भी है जर्जर
शहडोल. मुख्यालय से करीब 10 किमी. दूर ग्राम कोटमा के ठाड़ीपाथर गांव में ग्रामीण सडक़, पानी, बिजली व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गुजर बसर कर रहे हैं। गांव में पिछले दो महीने से पानी की सप्लाई ठप है। वहीं लो वोल्टेज की समस्या वर्षों से चली आ रही है। ग्रामीण बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है। यहां विद्यालय सिर्फ मध्यान्ह भोजन खिलाने के लिए ही खोला जाता है। जिससे यहां अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल में दाखिल कराने में कतराते हैं। इसके साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी लोगों को समय पर नहीं मिल पाता है। जिसका प्रमुख कारण गांव का शहर के अंतिम छोर में होना व अधिकारियों की कमजोर मॉनीटरिंग बताई जा रही है। यहां करीब 40 परिवार निवासरत है। जिन्हें शासन की मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
2-3 घंटे होता है विद्यालय का संचालन
ठाड़ीपाथर के प्राथमिक स्कूल संचालित है, इस विद्यालय में एक शिक्षिका पदस्थ है, इसके साथ ही एक अतिथि शिक्षक की नियुक्ति की गई है, लेकिन यहां शिक्षकों की मनमानी हावी है। बीते दो सालों से 2-3 घंटे के लिए ही विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। वह भी सिर्फ बच्चों को मध्यान्ह भोजन खिलाने तक ही सीमित है। पढ़ाई के नाम पर यहां की स्थिति शून्य है। विद्यालय की व्यवस्था रसोइयों के भरोसे ही रहती है। यानी यह मान लिया जाए कि रसोइया ही विद्यालय का संचालन करती हैं, शिक्षका सिर्फ उपस्थिति लगाने पहुंचती हैं। शुक्रवार को भी स्कूल में सहायिका 12.30 बजे बच्चों को भोजन करा कर छुट्टी कर दी थी। ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई एक दिन का रवैया नहीं है, हर रोज यहां इसी तरह विद्यालय का संचालन किया जाता है।
लो वोल्टेज समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि बीते कई वर्षों से लो वोल्टेज की समस्या बनीं हुई है। जिसके कारण विद्युत उपकरण काम नहीं करते, वहीं बच्चों को पढ़ाई में भी समस्या होती है। कई बार विद्युत विभाग को जानकारी भी दी गई, लेकिन सुधार नहीं किया जा रहा है। मेन रोड से आने वाली एलटी लाइन जगह-जगह जमीन के काफी करीब से लटकी हुई है, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
विद्युत समस्या होने के कारण यहां कई किसान रबी की फसल नहीं ले पाते।
दो महीने से नल-जल योजना बंद
ठाड़ीपाथर में बीते दो महीने से नल जल योजना ठप्प है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण कुंआ व हैंड पंप से पानी पीने को मजबूर हैं। घर-घर लगे नल शो पीस बन गए हैं। ग्राम पंचायत ग्रामीणों की समस्या को लेकर उदासीन रवैया अपना रही है। जिसके कारण अब ग्रामीण खुद आपस में पैसा कलेक्शन कर नल जल योजना को ठीक कराने की तैयारी बना रहे हैं। यहां करीब 40 परिवारों को बीते दो महीने से पानी की समस्या हो रही है।
जर्जर हो चुका भवन
स्कूल पूरी तरह जर्जर हो चुका हैं, यहां 1 से 5 तक की कक्षा मेें करीब 20 छात्र दर्ज है जिन्हें एक ही कमरे में बैठाया जाता है। वहीं इसी कमरे में एक किनारे आंगनबाड़ी के बच्चे भी बैठते हैं। स्कूल के दो कमरे पूरी तरह जर्जर हैं। स्कूल के गेट से बड़ा हादसा हो सकता है।

स्कूल का संचालन मनमाने तरीके से किया जाता है, आंगनबाड़ी के सहारे स्कूल का संचालन हो रहा है। जिससे शिक्षा का स्तर धीरे-धीरे गिरता जा रहा है। यहां अध्ययनरत बच्चों से अपना नाम लिखते नहीं आता। बच्चों को सिर्फ खाना के लिए बुलाया जाता है। 2-3 घंटे ही स्कूल का संचालन होता है। शिक्षक भी समय से नहीं आते हैं।
राकेश यादव, ग्रामीण

बीते दो महीने से पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पंचायत को पंप ठीक कराने कई बार कहा गया लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लाइट की समस्या भी कई वर्षों से बनी हुई है। लो वोल्टेज होने से उपकरण काम नहीं करते, जिससे खेती में भी समस्या होती है। विद्युत विभाग भी सुधार के लिए ध्यान नहीं दे रहा।
अमित यादव ग्रामीण
इनका कहना
ठाड़ीपाथर में अगर ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हंै तो इसके लिए सरंपच सचिव की जिम्मेदारी है कि व्यवस्था ठीक कराएं। मैं कल ही वहां की जानकारी लेकर पेयजल, स्कूल भवन व अन्य सुविधाएं दुरुस्त कराने निर्देशित करता हूं।
मुद्रिका सिंह, सीइओ जनपद सोहागपुर

स्कूल में एक शिक्षका पदस्थ है, एक अतिथि शिक्षक की नियुक्त की गई है। शिक्षिका का तीन दिवसीय प्रशिक्षण बीआरसी में चल रहा है। अतिथि शिक्षक को विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी है। अगर विद्यालय बंद रहा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
महेन्द्र कुमार मिश्रा, बीआरसी सोहागपुर

Published on:
08 Sept 2024 10:22 pm
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