बल्लियों में टिकी थी स्कूल की छतें...
शहडोल. शहर की सबसे पुरानी एमएलबी (महारानी लक्ष्मी बाई) स्कूल की कक्षाएं अब जर्जर बिल्डिंग में नहीं लगेंगी। पत्रिका की खबर के बाद अंतत: 80 साल पुरानी एमएलबी स्कूल की जर्जर बिल्डिंग को तोडऩे का काम शुरू किया गया है।
इसके साथ ही स्कूल मैदान में नई बिल्डिंग तैयार करने के लिए ले- आउट तैयार किया जा रहा है। टेक्निकल टीम सोमवार को एमएलबी स्कूल पहुंची। यहां पर ले- आउट और नक्सा तैयार करते हुए नई बिल्डिंग के लिए स्ट्रक्चर तैयार किया गया।
जल्द ही स्कूल भवन की बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हाल ही में जर्जर बिल्डिंग को डिस्मेंटल के निर्देश देते हुए रामंशा से 88 लाख रूपए स्वीकृत किए गए थे, जिसके बाद पीआईयू ने काम शुरू कराया है।
नई बिल्डिंग में कक्षाएं और प्राचार्य कक्ष
नई बिल्डिंग में पहले 9 कमरे तैयार किए जा रहे हैं। इसमें ७ कमरों में कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा एक कमरा प्राचार्य और एक कमरा स्कूल स्टॉफ के लिए होगा। इसके अलावा ले - आउट में वाहन और साइकिल के पार्किंग के लिए जगह भी बनाई गई है। नई बिल्डिंग तैयार होने से स्कूल के सामने का हिस्सा पूरा खाली हो जाएगा। सामने के हिस्से में व्यवसायिक तौर पर उपयोग करने के लिए दुकान बनाने की तैयारी चल रही है, जल्द इस पर भी मुहर लग सकती है।
800 छात्राओं की जान को हर पल खतरा
महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल की 800 छात्राओं की जान खतरे में थी। स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका था। बारिश में पूरा परिसर आसपास की नालियों का भर जाता था। स्कूल में बदहाली के हालात ऐसे थे कि छतों को गिरने से बचाने के लिए बल्लियां लगाई गई थी। स्कूल में जगह जगह छतों के सपोर्ट के लिए बल्लियों को टेक दिया गया था। अक्सर छतों से परत और छज्जे का टुकड़ा टूटकर नीचे गिरता था। कई मर्तबा तो इसकी चपेट में छात्राएं भी आ चुकी थी।
ये होती थी दिक्कतें
बारिश के दौरान आसपास के नालों का गंदा पानी परिसर में घुस जाता था। 8 दशक से अधिक पुरानी स्कूल होने के कारण भवन की छत और छज्जा टूटकर छात्राओं पर गिरता था। सब्जी व्यापारी दुकानों से निकलने वाले कचरे को स्कूल ग्राउंड में फेंक देते थे। कई मर्तबा छज्जा टूटने की वजह से शिक्षक और छात्राओं को चोट पहुंची थी।
ये होगा फायदा
अब तक स्कूल दो पालियों में संचालित होती थी। नई बिल्डिंग तैयार होने से ६वीं से १२ तक की कक्षाएं एक ही पाली में लगेंगी।
नई बिल्डिंग तैयार होने से सामने का हिस्सा खाली हो जाएगा। जिसका उपयोग व्यवसायिक तौर पर भी किया जा सकेगा।
नई बिल्डिंग से छात्राओं की जान पर खतरा नहीं रहेगा। नई बिल्डिंग से पार्किग व्यवस्थित होगी और बारिश के समय स्कूल की कक्षाओं में घुसने वाले पानी से भी राहत मिलेगी।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
एमएलबी स्कूल की बिल्डिंग लगभग 8 दशक पुरानी थी। बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी थी। छतों को गिरने से बचाने के लिए बल्लियों का टेक लगाया गया था। महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल का लोक निर्माण विभाग की टीम ने निरीक्षण में खतरा बताया था। पीडब्लूडी कार्यपालन यंत्री ने सहायक आयुक्त को पत्र लिखा था और स्कूल भवन को डिस्मेंटल की बात भी कही थी। कई साल बीतने के बाद भी स्कूल भवन नहीं गिराया गया था और जर्जर बिल्डिंग में कक्षाएं लग रही थी। छात्राओं की जिंदगी से जुड़े इस मुद्दे को पत्रिका ने गंभीरता से उठाया। एक के बाद एक कई खबरें प्रकाशित की। संज्ञान में लेते हुए तत्कालीन कमिश्नर बीएम शर्मा ने आदिवासी विकास विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्राचार करते हुए बिल्डिंग बनाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद ले आउट तैयार करते हुए बिल्डिंग को तोड़कर नई बिल्डिंग तैयार की जा रही है।