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शहडोल- प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी 24 अप्रैल को मंडला के रामनगर में आ रहे हैं। जिसकी तैयारियां काफी तेजी से चल रही हैं। मंडला जिले के रामनगर में प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी आदि उत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। रामनगर ग्राम पंचायत मंडला जिले में है जो विखासखंड बिछिया के अंतर्गत आता है, और मंडला जिला मुख्यालय से इसकी दूरी लगभग 20 किलोमीटर है।
रामनगर इसलिए है खास
रामनगर मंडला जिले से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है, और यहां के ऐतिहासिक महल इसकी खास पहचान हैं, मोतीमहल, बेगम महल और रायभगत की कोठी जैसे महल रामनगर की पहचान हैं। ये महल 11वीं सदी में गोंड कालीन शासन काल में बने हैं, यहां के लोगों की ऐसी मान्यता है कि इन महलों का निमार्ण महज ढाई दिन में किया गया था। रामनगर के इन महलों के निर्माण को लेकर कई कहानियां हैं।
गोंड राजा हृदयशाह ने रामनगर में महल का निर्माण 11वीं शताब्दी में करवाया था। महल को लेकर आज भी कई बातें प्रचलित है, कहा जाता है कि यहां के महलों का निर्माण ढाई दिन में हुआ था, महल से लगभग 4-5 किलोमीटर दूर अष्टफल पत्थरों का पहाड़ है जिसे काली पहाड़ी के नाम से जाना जाता है, यहां के पुराने ग्रामीणों का कहना है कि महल का निर्माण इन्हीं विशालकाय पत्थरों से किया गया है, और उस दौर मेंजब संसाधनों की कमी थी, इतने पत्थरों को यहां लाने में एक साल से भी ज्यादा वक्त लग जाता है, ऐसे में उस दौर के राजा हृदयशाह ने अपने तंत्र विद्या से इन पत्थरों को लाया था, कहते हैं राजा हृदयशाह तंत्र विद्या में परांगत थे। उन्होंने तंत्र विद्या का उपयोग किया था। जिससे काली पहाड़ी के अष्टफलक पत्थर खुद उड़कर वहां पहुंच गए थे।
गोंड़ राजा तंत्र शास्त्र में रखते थे विश्वास
इतिहास के जानकार बताते हैं कि गौड़ राजा तंत्र शास्त्र में विश्वास रखते थे। वो कई कार्यों के लिए तंत्र विद्या प्रयोग किया करते थे।