सम्भवत: दोनों के बीच कुछ ऐसे संबंध थे जो आफताब के गुरु शाकिर के परिजनों को पसंद नहीं थे।
शाहजहांपुर। शाहजहांपुर में सैन्य इलाके के फायरिंग रेंज में तीन दिन पहले मिली लाशों के मामले में पुलिस की जांच अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। ख़ास बात ये है कि दोनों शवों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में एक की मौत फांसी पर लटकने (हैंगिंग) से तो दूसरे का विसरा प्रिजर्व हुआ है। पुलिस की संजीदगी का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोनों की गुमशुदगी से लेकर लाशें मिलने तक पुलिस पीड़ित परिवार की मदद करने की बजाय उलटे धमकाती रही।
युवक की तलाश
थाना सदर बाजार के इंस्पेक्टर डीसी शर्मा के अनुसार पुलिस की जांच चल रही है। आफताब नामक युवक शाकिर की सिलाई की दुकान पर काम पिछले कई सालों से काम सीख रहा था। सम्भवत: दोनों के बीच कुछ ऐसे संबंध थे जो आफताब के गुरु शाकिर के परिजनों को पसंद नहीं थे। पुलिस शाकिर की दुकान पर काम करने वाले दूसरे एक अन्य लड़के को तलाश कर जानकारी जुटा रही है और जल्दी ही दोनों की मौत के रहस्य से पर्दा उठा दिया जाएगा।
आफताब ने बुलाया था शाकिर को
दरअसल शाहजहांपुर के थाना सदर बाजार इलाके के तारीन जलालनगर के रहने वाले बाबर खान का 16 साल का बेटा आफताब मोहल्ले के ही रहने वाले शाकिर अली की सिलाई की दुकान पर पिछले लगभग आठ सालों से सिलाई का काम सीख रहा था। आरोप है कि शाकिर तीन दिन पहले 13 सितंबर को आफताब को घर से बुलाकर ले गया। लेकिन शाम तक न ही आफ़ताब घर लौटा और न ही शाकिर। आफताब के पिता लगातार अपने बेटे के गायब होने की सूचना थाना सदर बाजार पुलिस सहित आला अधिकारीयों को देते रहे। लेकिन पुलिस आफताब के पिता को डांट डपटकर भगा देती थी। लेकिन 16 सितम्वर को कैंट इलाके में सेना की फायरिंग रेंज में आफताब और उसके गुरु शाकिर की क्षत-विक्षित हाल में लाशें मिलीं। जिसमें शाकिर की लाश रस्सी से पेड़ पर लटकी हुई थी और आफताब की लाश जमीन पर पड़ी थी। आफताब के पिता बाबर का आरोप है कि उसके बेटे की हत्या पुलिस की लापरवाही के चलते हुई है।