जिस दिन युवती की शादी थी उसी दिन विवाह था। वो अपनी परीक्षा किसी हाल में छोड़ना नहीं चाहती थी, लिहाजा मेहंदी लगे हाथों में वो परीक्षा देने चली गई।
शाहजहांपुर। जिले के कटिया टोला की रहने वाली मीनू ने वर्ष 2011 में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी की परीक्षा पास की थी, लेकिन टीचर नहीं बन पायीं। लेकिन प्रयास बराबर जारी रहे। इस साल मीनू ने फिर से टीईटी का फार्म भरा। लेकिन इस बार किस्मत ने उनकी परीक्षा ले डाली। जिस दिन उनकी शादी की तारीख तय हुई, उसी दिन परीक्षा थी। सुबह परीक्षा थी और शाम को उत्तराखंड से उसकी बारात आनी थी। परिवार के सभी लोगों को लगा कि अब तो मीनू को परीक्षा छोड़नी पड़ेगी। लेकिन मीनू के हौसले बुलंद थे। वो हर हाल में परीक्षा देना चाहती थी। लिहाजा शादी की तिथि निकलने के बाद भी उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी।
18 नवंबर को सुबह चार बजे से उठकर उसने अपनी शादी की सभी रस्में अदा कीं और साढ़े नौ बजे भाई के साथ पहुंच गई परीक्षा केंद्र पर। वहां जाकर उसने टीईटी का एग्जाम दिया। हालांकि शाम को जूनियर टीईटी की परीक्षा का समय मैच न हो पाने के कारण छोड़नी पड़ी।
परीक्षा देने के बाद जब मीनू से बात की गई तो उसका कहना था कि शादी के दिन पेपर देने का अनुभव गिने चुने लोगों को ही मिलता है। हालात ऐसे होते हैं कि आप बस महसूस ही कर सकते हैं, बयां नहीं कर सकते। एक तरफ परीक्षा की घबराहट थी, तो दूसरी तरफ शादी की खुशी। उनका कहना है कि शादी जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी है हमारा कॅरियर भी है। इसलिए इसके प्रति गंभीरता जरूरी है। यहां बात सिर्फ टाइम मैनेजमेंट की थी। समय को व्यवस्थित करके मैंने अपनी शादी की रस्मों को भी पूरा कर दिया और अपनी परीक्षा भी दे दी।