शामली के लिसाढ़ गांव में एक परिवार पर टूूटा कोरोना कहर, कोरोना के चलते माता-पिता की मौत तो सदमे में दादा-दादी भी चल बसे
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
शामली.कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश में ऐसी तबाही मचाई है, जिससे अनगिनत परिवार बर्बाद हो गए हैं। इसका असली दर्द वहीं समझ सकता है, जिसने अपनों को खोया है। ताजा मामला शामली का है, जहां एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया है। कोरोना के चलते यहां तीन बच्चे अनाथ हो गए हैं। उनके सिर से माता-पिता के साथ दादा-दादी का साया भी हमेशा के लिए उठ गया है।
दरअसल, शामली के गांव लिसाढ़ निवासी किसान मांगेराम मलिक खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर हंसी-खुशी जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन कोरोना ने ऐसा कहर बरपाया कि परिवार के चार लोगाें की जिंदगी को लील लिया। कोरोना के दौरान पहली लहर में मांगेराम का 40 वर्षीय पुत्र लोकेंद्र मलिक कोरोना पॉजीटिव पाया गया था। लोकेन्द्र मलिक की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसके पिता मांगेराम अपने पुत्र को लेकर शामली के हॉस्पिटल में उपचार कराते रहे। उपचार के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने पर अप्रैल 2020 में लोकेन्द्र की कोरोना के कारण मौत हो गई। लोकेन्द्र की मौत के कारण उसके परिजनों पर गम का पहाड़ टूट गया। लोकेन्द्र के निधन के बाद घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा।
मासूम हिमांशु ने बताई आपबीती
लोकेन्द्र के 13 वर्षीय बड़े पुत्र हिमांशु मलिक ने बताया कि पापा ने उसका व उसकी 11 वर्षीय बहन प्राची की एडमिशन शामली के सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में कराया था। वर्तमान में वह हाईस्कूल तथा उसकी बहन कक्षा नौ की छात्रा है और उसका 10 वर्षीय छोटा भाई प्रियांशु गांव लिसाढ़ के सरस्तवी शिंशु मंदिर स्कूल में कक्षा सात में पढ़ रहा है। यह कोरोना काल उनके लिए अभिशाप बन कर आया है। पिता लोकेन्द्र की मृत्यु के बाद दादा मांगेराम व उनकी दादी शिमला इस सदमें को झेल नहीं पाए और कुछ समय बाद दादा-दादी चल बसे। परिवार अभी इनन झटकों से उभरा भी नहीं था कि इस वर्ष आई कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों की मां 40 वर्षीय सविता भी कोरोना वायरस की चपेट में आ गई। लगातार बुखार के बाद भी सविता के मन में पूर्व में घर में हो चुकी तीन मौतों से इतना डर बैठ गया कि वह शामली जाने की हिम्मत ना जुटा पाई। बच्चों के बार-बार समझाने के बाद भी जब सविता तैयार नहीं हुई तो बच्चों ने मामले की जानकारी अपने मामा संजू को दी।
मामा ने अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन फिर भी नहीं बची मां
संजू ने गांव लिसाढ़ पहुंचकर अपनी बहन को शामली ले जाकर एक प्राइवेट हॉस्पिटल में सीटी स्कैन कराया। जहां उसके फेफड़ों में 90 प्रतिशत से भी अधिक सक्रंमण पाया गया तो डाक्टरों ने जवाब दे दिया। इसके बाद 30 अप्रैल को सविता ने दम तोड़ दिया। एक साल में चार मौत हो जाने के कारण बच्चों के ऊपर गम का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार में अब तीन बच्चों के अलावा कोई नहीं बचा है। परिवार की जिम्मेदारी अब 13 वर्षीय हिमांशु के कंधों पर है। वही अब अपनी बहन प्राची व भाई प्रियांशु की देखभाल करने के साथ अपने खेतों का काम देख रहा है। प्रियांशु घर में हुए हादसे से बहुत विचलित है और अपने भाई व बहन के भविष्य को लेकर आंशकित है।