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महिला आरक्षण पर सपा सांसद इकरा हसन का जवाब, महिलाओं का नाम लेकर भाजपा सेंक रही राजनीतिक रोटियां

Iqra Hasan Lok Sabha Speech : समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर केंद्र सरकार को चुनौती दी। उन्होंने बिना परिसीमन के मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण लागू करने की मांग की।

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सांसद इकरा हसन, PC- ANI

लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) और परिसीमन विधेयक पर चल रही बहस के दौरान समाजवादी पार्टी की कैराना सांसद इकरा हसन ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। हलांकि यह बिल लोकसभा में पास नहीं हो सका। इकरा हसन ने कहा कि 2023 का मूल अधिनियम आज भी बरकरार है और सरकार द्वारा लाए गए संशोधन (जिसमें परिसीमन का प्रावधान था) विफल हो चुके हैं।

सत्ता पक्ष के लोग शायद जागरूक नहीं है क्योंकि महिला आरक्षण के विरोध में आज वोटिंग थी ही नहीं। जो 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम है वह आज भी बरकरार है, उसके संबंध में जो संशोधन ये लाए थे, जिसमें ये परिसीमन करना चाहते थे… वह विफल हुआ है। हम नहीं चाहते कि महिलाओं का नाम लेकर भाजपा अपनी राजनीतिक रोटी सेके… अगर सरकार की नीयत सही है तो 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण लागू करें…'

जान लें क्या है पूरा मामला?

  • 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम: संसद ने सर्वसम्मति से पास किया था। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है। लेकिन यह आरक्षण नई जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था। मूल कानून में 2026 के बाद की पहली जनगणना का जिक्र था।
  • 2026 का विशेष संसदीय सत्र (16-18 अप्रैल) : सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संबंधित संशोधन पेश किए। इनका मकसद 2029 के लोकसभा चुनाव से आरक्षण लागू करना और 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण करना है। इससे लोकसभा सीटें बढ़कर 816 (लगभग) हो सकती हैं, जिसमें 273 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
  • विपक्ष का आरोप : सपा, कांग्रेस समेत विपक्षी दल कह रहे हैं कि सरकार परिसीमन के नाम पर देरी कर रही है और राजनीतिक फायदे के लिए सीटों का गठन (gerrymandering) करना चाहती है। इकरा हसन ने इसे महिलाओं के साथ धोखा करार दिया।

इकरा हसन ने और क्या कहा?

संसद में अपने भाषण के दौरान इकरा हसन ने कहा कि सरकार 2023 में खुद कह चुकी थी कि आरक्षण 10 साल बाद (नई जनगणना के बाद) लागू होगा। अब उसी को डीलिमिटेशन और सेंसस के आड़ में छुपाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने मांग की कि अगर सरकार की नीयत साफ है तो बिना परिसीमन के मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया, बल्कि आज इसके संशोधन पर वोटिंग ही नहीं हुई।

सपा ने अलग से कोटे की मांग की

समाजवादी पार्टी ने लगातार मांग की है कि महिला आरक्षण में OBC और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटा (आरक्षण के भीतर आरक्षण) भी दिया जाए। इकरा हसन ने इस मुद्दे पर भी सरकार को घेरा।