
श्योपुर,
जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्डमें डॉक्टर और स्टॉफ की लापरवाही के कारण आए दिन प्रसूता और नवजात बच्चों की मौत की फेहरिस्त बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद जिला अस्पताल का सिस्टम नहीं बदल रहा। हालांकि हर मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच के बाद कार्रवाई किए जाने की बात करते है। मगर मौत मामले में अभी तक न तो किसी डॉक्टर पर कार्रवाईकी गई और न ही मेटरनिटी वार्ड स्टॉफ पर।
ताजा मामला अभी दो दिन पहले सामने आया है। जिसमें मुदालापाड़ा निवासी गर्भवती महिला रामसिया बैरवा को उसके परिजनों ने डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में दाखिल कराया गया। परिजनों का आरोप था कि प्रसूता रातभर मेटरनिटी वार्ड में दर्द से तड़पी। मगर ड्यूटी डॉक्टर ने उसे कहने के बाद भी नहीं देखा। जबकि सुबह गर्भवती महिला को बिना देखे ही रैफर कर दिया। जिससे गर्भवती महिला की प्रायवेट वाहन में सवाईमाधोपुर ले जाने के दौरान रास्ते में डिलीवरी हो गई। हालांकि डिलीवरी के दौरान बालक पैदा हुआ। लेकिन यह नवजात बालक कुछ देर बाद ही मृत हो गया।
हर बार होती है जांच,मगर नतीजा सिफर
प्रसूता रामसिया बैरवा के नवजात बच्चे की मौत होने पर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाईकरने की बात कही है। जांच के लिए सीएमएचओ ने सिविल सर्जन को पत्र भी लिख दिया है। मगर जांच के बाद जो दोषी होगे,उन पर कार्रवाईहो पाएगी,इसको लेकर संशय बना हुआ है।क्योकि अभी तक स्वास्थ्य विभाग ऐसे कईमामलों की जांच करवा चुका है।लेकिन अभी तक सजा किसी को भी नहीं दी गई।
वर्जन
रामसिया के नवजात बच्चे की मौत मामले की जांच होगी,जांच में जो दोषी होगा,उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रही बात दोषियों पर कार्रवाईकी तो हम जांच में रिपोर्टदोषी साबित होगा,तभी तो हम संबंधित कार्रवाई करेगे। जांच रिपोर्ट जो दोषी बनते है,उनके खिलाफ हम कार्रवाईकरते है।
डॉ एनसी गुप्ता
सीएमएचओ,श्योपुर
इन मामलों में नहीं हुई किसी पर कार्रवाई
केस-1
शहर के लोधा मोहल्ला निवासी अंजलि बैरवा ने 29-30 दिसंबर की रात जिला अस्पताल की मेटरनिटी विंग में बच्ची को जन्म दिया। जन्म के कुछ समय बाद ही बच्ची ने दमतोड़ दिया। प्रसूता की सास का आरोप था कि बच्ची जीवित पैदा हुई। नर्सों ने बच्ची की हालत गंभीर बताई, तो ड्यूटी रूम में सो रहे डॉक्टर को बुलाने उनके कमरे का दरवाजा खटखटाया। मगर डॉक्टर कमरे से बाहर नहीं आए। जिसकारण बच्ची ने दम तोड़ दिया।
केस 2
कराहल निवासी प्रसूता रिचा 26 वर्ष पत्नी मनोज शर्मा की गत 28 सितंबर को जिला अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी हुई थी। मगर डिलीवरी होने के बाद प्रसूता की मेटरनिटी वार्ड में मौत हो गई।
केस 3
ग्राम बगवाड़ा निवासी गर्भवती मनीषा बैरवा की 3 मई को जिला अस्पताल मे नॉर्मल डिलीवरी हो गई। मगर डिलीवरी के कुछ देर बाद प्रसूता को ब्लडिंग होना शुरु हो गई। परिजनों का आरोप था कि ड्यूटी डॉक्टर को बुलाने पहुंचे तो डॉक्टर देरी से वार्ड में पहुंचे। वहीं स्टॉफ ने भी ऐसी कोई गंभीरता नहीं दिखाई,जिससे उसकी ब्लडिंग रुक सके। इस अनदेखी से मनीषा बैरवा की मौत हो गई।
केस-4
पिछले साल तेलीपुरा आदिवासी सहराना निवासी गर्भवती पपीता आदिवासी की घर पर ही डिलीवरी हो गई।इसके बाद उसे वीरपुर अस्पताल ले जाया गया।जहां कोई डॉक्टर नहीं मिला तो जिला अस्पताल लाया गया।मगर रातभर जिला अस्पताल में रुकने के बाद प्रसूता की मौत हो गई।