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भारत में अब 52 चीते, राष्ट्रपति मुर्मु ने श्योपुर में ली चीता प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी

President Droupadi Murmu- राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने चीता प्रोजेक्ट की जानकारी ली, चीता मित्रों के प्रयासों की तारीफ की, यह चीता मित्र चीते के व्यवहार को लेकर करते हैं लोगों को जागरूक...।

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President Droupadi Murmu

President Droupadi Murmu- श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में सोमवार को चीता मित्रों से जानकारी लेतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु।

Kuno National Park- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार को श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में थीं। इस दौरान उन्होंने पूरे चीता प्रोजेक्ट की जानकारी ली,वहीं चीता मित्रों से वन टू वन चर्चा भी की। कूनो नेशनल पार्क से लगे गांवों में यह चीता मित्र तैनात हैं और लोगों को चीता के व्यवहार से उन्हें अवगत कराते हैं।

देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने अपने दो दिवसीय श्योपुर जिला स्थित कूनो नेशनल पार्क के प्रवास के दौरान सोमवार को चीता मित्रों से संवाद किया। यह चीता मित्र आसपास के क्षेत्रों के लोगों को चीते के व्यवहार से उन्हें अवगत कराते रहते हैं।मुर्मु ने चीता मित्रों से काफी देर तक बातचीत की। उन्होंने चीता संरक्षण के प्रयासों की जानकारी भी ली। इस दौरान चीता मित्रों से राष्ट्रपति ने पूछा कि चीतों की सुरक्षा कैसे करते हैं, आमजन के बीच चीतों के व्यवहार को लेकर भी बीत की। उन्होंने सभी चीता मित्रों से वन-टू-वन चर्चा कर प्रयासों की सराहना की।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को चीता मित्रों ने बताया कि कूनो नेशनल पार्क से लगे सभी ग्रामों में चीता मित्र मौजूद हैं, जिनके द्वारा चीतों की सुरक्षा के बारों में ग्रामीणों को जागरूक किया जाता है। चीतों के आबादी क्षेत्र में चले जाने की स्थिति में आम लोगों का उसके प्रति व्यवहार कैसा हो, इस बारे में भी जानकारी दी जाती है।

नुकसान नहीं पहुंचाता चीता

चीता मित्र ग्रामीणों को यह जानकारी देते हैं कि स्वाभाविक रूप से चीता किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है। चीता जब आबादी क्षेत्र या खेतों में दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को सूचना देना चाहिए, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुंच पाए। भारत में चीतों की दोबारा से बसाहट के लिए यह परियोजना अति महत्वपूर्ण है।

तीन साल हो गए प्रोजेक्ट को

इस दौरान चीता मित्र कुलदीप आदिवासी सिलोरी, संग्राम आदिवासी, राजनदंनी आदिवासी हथेडी, मल्हा आदिवासी सेसईपुरा, शिवम आदिवासी पालपुर, विनोद आदिवासी पैरा, रामलखन आदिवासी कराहल, लालाराम आदिवासी सेसईपुरा, दौलतराम आदिवासी सेसईपुरा और सतीश आदिवासी मोरावन मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पुनर्स्थापन योजना को लगभग साढ़े तीन वर्ष से अधिक का समय हो गया है। नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका एवं बोत्सवाना से चीतों को लाया गया है।

52 हो गई चीतों की संख्या

वर्तमान में देश में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो नेशनल पार्क में तथा 3 चीते मंदसौर स्थित गांधी सागर अभ्यारण में मौजूद हैं। भारत में जन्मे चीतों की संख्या 32 है। चीता प्रोजेक्ट निरंतर सफलता की ओर आगे बढ़ रहा है। बता दें, चीता मित्रों से संवाद के बाद राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु हेलीकॉप्टर से ग्वालियर रवाना हुईं। हेलीपेड पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं जनप्रतिनिधि मौजूद थे।