जिसके लिए कराया है ट्रेक्टर का रजिस्ट्रेशन करना पड़ेगा उसी कार्य में उपयोग

जिले में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का हो रहा नियम विरुद्ध उपयोग, परिवहन विभाग को हो रहा नुकसान

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Jan 16, 2017
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श्योपुर ।
परिवहन विभाग ने कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियों को टैक्स मुक्त रखा है। किसानों की आड़ में हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिक कृषि कार्य के नाम से इनका पंजीयन कराकर रेत ढुलाई व अन्य व्यवसायिक कार्य कर रहे हैं। इससे परिवहन विभाग को हर माह लाखों रुपए का परिवहन टैक्स के रुप में राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि खेती को फायदे का धंधा बनाने के लिए शासन किसानों को सुविधा प्रदान करते हुए कृषि कार्य में उपयोग होने वाले संसाधनों व यंत्रों पर लाखों रुपए का अनुदान देता है।


क्षेत्र में हजारों व्यवसायी किसानों की आड़ में शासन से अनुदान प्राप्त कर ट्रैक्टर-ट्राली खरीदकर उसका पंजीयन कराकर वाहन का उपयोग रेत, गिट्टी, ईंट, बजरी, मिट्टी ढुलाई सहित अन्य व्यवसायिक कार्यों में करते चले आ रहे हैं, जिससे शासन को तो चूना लग ही रहा है, साथ ही आए दिन हादसे भी हो रहे हैं। बावजूद इसके न केवल शहर बल्कि बड़ौदा, विजयुपर कराहल आदि क्षेत्रों में व्यापारियों द्वारा खुले आमआम ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का व्यवसायिक उपयेाग हो रहा है।


लगभग दुगुनी हो जाती है फीस

बताया गया है कि कृषि कार्य के लिए जब कोई किसान अपने वाहन का पंजीयन कराता है तो उसे 2700 रुपए देना होते हैं। यदि इस वाहन का उपयोग कमर्शियल कार्य के लिए किया जाता है तो उसका पंजीयन शुल्क 5000 रुपए के अतिरिक्त एक प्रतिशत परिवहन के नाम पर वसूला जाता हैं। बताया गया गया है कि जिले में एक भी ट्रैक्टर-ट्राली का पंजीयन कमर्शियल उपयोग के लिए नहीं किया गया है, जबकि 90 प्रतिशत से अधिक व्यवसायिक कार्य में लगे हुए हैं।



अभी हमने वाहन चेकिंग अभियान चलाया है, लेकिन जल्द ही केवल ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की चेकिंग को कार्यवाही करेंगे और व्यवसायिक उपयोग में आने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की धरपकड़ कर उनसे परिवहन शुल्क वसूला जाएगा।
अजीत बाथम, डीटीओ, श्योपुर


Published on:
16 Jan 2017 03:27 pm
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