हाल-ए-जिला अस्पताल: बांस-बल्ली के सहारे अस्पताल पहुंच रहे मरीज
सीधी। जिला अस्पताल में मरीजों की समस्या को देखते हुए रेडक्रॉस व एक संस्था की ओर से उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस को सिविल सर्जन ने अपनी सवारी बना ली। जबकि, यहां जरूरतमंदों को एम्बुलेंस न मिल पाने की शिकायतें आए दिन सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं एम्बुलेंस के अभाव में कई बार लोगों को जिंदगी से भी हाथ धोना पड़ जाता है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात की परवाह नहीं है।
जरूरी उपकरण गायब
सूत्रों की मानें तो सीएस द्वारा रेडक्रॉस के लिए उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस का उपयोग घर से अस्पताल और अस्पताल से घर आने-जाने के लिए करते हैं। कभी-कभार उन्हें रीवा और सतना का भी टूर करना पड़ जाता है। इसके लिए उन्होंनें एम्बुलेंस में लगे जरूरी उपकरण भी निकलवा दिए हैं। जिसके बाद इस वाहन का उपयोग मरीजों को लाने ले जाने में किया ही नहीं जा सकता है।
मरीजों के लिए चालक न होने किया जाता है बहाना
सांसद की मांग पर विशाखापट्टनम स्टील प्लांट आंध्रप्रदेश ने यह एम्बुलेंस जिला अस्पताल को सीआरएस मद से दी थी। ताकि, जरूरतमंदों को उपलब्ध कराई जा सके। लेकिन सिविल सर्जन ने इसे भी खुद उपयोग करने लगे। मरीज आज भी परेशान हैं। जरूरत पडऩे पर वे एम्बुलेंस मांगते हैं, लेकिन चिकित्सक व्यवस्था न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
निजी कार्य में उपयोग
वहीं सूत्रों की बात मानें तो जमोड़ी निवासी एक महिला ने रेडक्रॉस चिकित्सालय निर्माण के लिए जहां अपने पट्टे की जमीन दान दी थी। रेडक्रॉस वाहन खरीदी के लिए राशि भी दी गई, जिससे वाहन खरीदा गया, लेकिन वह वाहन मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रहा। बल्कि, जिम्मेदार अफसर उसे निजी कार्य में उपयोग कर रहे हैं।
मरीजों को उपलब्ध कराई जाती है एम्बुलेंस
पूर्व सिविल सर्जन के द्वारा एक एम्बूलेंंस वाहन का जरूर मिसयूज किया गया है किंतु मुझे जबसे प्रभार मिला है मैं विशाखापट्टनम से मिली एम्बुलेंस को भी मरीजों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराता हूं। मैं अपने निजी कार्य के लिए अपने डस्टर वाहन का उपयोग करता हूं। यहां गुटबाजी है, जिसके कारण कुछ लोग आरोप लगाते होंगे उसका मैं कुछ नहीं कर सकता जबसे प्रभार मिला है मैं व्यवस्था सुधारने में लगा हुआ हूं।
डॉ. एसबी खरे, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल सीधी