सीकर. बाबा श्याम के लक्खी मेले में प्रशासन के नए नवाचारों ने भक्तों को पूरी राहत दी है। खाटूश्यामजी में पहली बार आठ दिन का मेला भरा और इसमें 19 लाख भक्तों के आने का नया रेकॉर्ड बना है। पिछले 15 सालों में पहली बार भक्तों को एकादशी के दिन भी दो से तीन घंटे […]
सीकर. बाबा श्याम के लक्खी मेले में प्रशासन के नए नवाचारों ने भक्तों को पूरी राहत दी है। खाटूश्यामजी में पहली बार आठ दिन का मेला भरा और इसमें 19 लाख भक्तों के आने का नया रेकॉर्ड बना है। पिछले 15 सालों में पहली बार भक्तों को एकादशी के दिन भी दो से तीन घंटे में आसानी से दर्शन भी हुए। जबकि पिछले साल 12 दिन के मेले में 22 लाख भक्त पहुंचे थे। इस साल हर जोन में अलग-अलग पार्किंग, शाहपुरा व रेनवाल सड़क प्रोजेक्ट पूरे कराने की वजह से भक्तों को जाम से पूरी तरह राहत मिली। इसके अलावा जयपुर-बीकानेर हाइवे पर भी यातायात बाधित नहीं रहा। हालांकि पहले प्रशासन व मंदिर कमेटी की ओर से मेले में 25 से 30 लाख भक्तों के आने की संभावना पर काम किया जा रहा था, लेकिन बोर्ड परीक्षा व सोशल मीडिया की अफवाह आदि वजह से भक्तों की भीड़ का रेकॉर्ड नहीं बन सका।
खाटूश्यामजी मेले में इस साल के इंतजामों ने भक्तों के अनुभव ही पूरी तरह बदल दिए। सुगम दर्शन, बेहतर पार्किंग इंतजाम आदि वजहों से भक्त बेहतर अनुभव लेकर गए है। प्रशासन की ओर से इस साल पांच नए नवाचार किए गए, इन वजहों से भक्तों को पूरी राहत मिली है। खास बात यह है अधिकारियों ने पुराने अनुभवों का फायदा उठाते हुए कई व्यवस्थाओं का बदला।
पार्किंग: 40 हजार वाहनों की क्षमता, मंदिर तक पहुंच भी आसान
प्रशासन की ओर से पार्किंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया। प्रशासन ने पहली बार निशुल्क पार्किंग की क्षमता दोगुनी तक बढ़ा दी। खाटूश्यामजी आने वाले सभी मार्ग पर लगभग 40 हजार वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की। इसका फायदा हजारों भक्तों को मिला है। भक्तों का कहना है कि निशुल्क पार्किंग का यह नवाचार मेले के बाद भी जारी रहना चाहिए।
दिव्यांगों को पुलिस व प्रशासन की ओर से स्वयंसेवकों की टोली की ओर से ले जाकर सुगम दर्शनों के इंतजाम किए गए। इसका फायदा दस हजार से अधिक दिव्यांगों को मिला है।
इस साल प्रशासन ने खोया-पाया केन्द्रों की संख्या भी बढ़ाकर छह से बारह कर दी। मेले में गुम होने वाले मोबाइल, बैग, चप्पल व जूते आदि सामग्री के फोटो भी बड़ी स्क्रीन पर दिखाए गए। इससे लोगों को अपना गुम सामान तलाशने में परेशानी नहीं हुई। इसके अलावा छोटे बच्चों के गुम होने पर परिजनों से मिलाने के लिए अलग से टीम लगाई है।
1. बेहतर कनेक्टीविटी:
प्रशासन ने इस साल पुराने अनुभवों को देखते हुए सभी पहले खाटू आने वाले सभी मार्ग की मरम्मत कराई। पहले जाने के लिए मंढा मार्ग ही खुला रहता था, इस पर भी लोग वाहन चालक मर्जी से पार्किंग कर देते थे। इस साल प्रशासन ने शाहपुरा मार्ग को शुरू कराया इससे जाम की समस्या का समाधान हो गया। रेनवाल मार्ग की सड़क शुरू होने से जयपुर से आने वाले भक्तों का आवागमन इस मार्ग से ज्यादा रहा। ऐसे में बेहतर कनेक्टीविटी से पूरे मेले में व्यवस्था बनी रही।
2. एप व क्यूआर कोड:
प्रशासन व मंदिर कमेटी की ओर से श्याम सारथी एप को रियल टाइम अपडेट किया गया। इससे भक्तों को काफी आसानी रही। वहीं दर्शनों के बाद श्रद्धालुओं को पार्किंग तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए गए, जो पूरी तरह सफल रहे। इससे भीड़ प्रबंधन में काफी सहूलियत मिली।
3. नहीं बढ़ने दिया भीड़ का प्रेशर:
इस साल मेले में जाम नहीं लगने की वजह से भीड़ का प्रेशर नहीं बना। इस कारण भक्तों को मेले के शुरूआती दिनों में महज दो से तीन किलोमीटर पैदल चलने पर 45 मिनट में आसानी से दर्शन हुए। जबकि पिछले साल शुरूआती दिनों में दो घंटे में दर्शन हुए। इस साल एकादशी के दिन महज दो से तीन घंटे में दर्शन हुए। पिछले साल एकादशी के दिन भक्तों को छह से आठ घंटे में दर्शन हुए।
टीम भावना के दम पर पाकिंग, कनेक्टीविटी, पेयजल, स्वास्थ्य, सुगम दर्शन, ई-रिक्शा, रोशनी, स्वच्छता आदि पर खास फोकस किया। इसके दम पर मेले में भक्तों को सुगम तरीके से दर्शन हुए है। इस साल आठ दिन के मेले में 19 लाख भक्त पहुंचे है जो एक रेकॉर्ड है।
मुकुल शर्मा, जिला कलक्टर
खाटूनगरी में प्रवेश व निकास की व्यवस्था पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया ताकि भक्तों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। पिछले मेले की व्यवस्थाओं से सीख लेते हुए नवाचार किए इसका फायदा पूरे मेले में मिला है। दिव्यांगों को भी बेहतर तरीके से आसानी से दर्शन कराए गए।
प्रवीण नायक, नूनावत, पुलिस अधीक्षक, सीकर
दो महीने शुरू कर दी थी तैयारी, इसलिए भक्तों को मिला सकून
इस बार मेले में व्यवस्थाओं को लेकर विशेष रणनीति तैयार की गई थी। पिछले मेले में जो कमियां सामने आई थीं, उन्हें चिन्हित कर समय रहते पूरी तरह दूर किया गया। इसका फायदा इस साल के मेले में मिला है।
मोनिका सामोर, मेला मजिस्ट्रेट, खाटूश्यामजी
फाल्गुनी मेले के दौरान जमीनी स्तर पर सुरक्षा और व्यवस्था की कमान मजबूती से संभाली गईं । भीड़ के दबाव, श्रद्धालुओं की आवाजाही और प्रमुख मार्गों पर निरंतर निगरानी रखते हुए पुलिस टीम को सक्रिय मोड पर रखा गया।
पवन चौबे, थाना प्रभारी, खाटूश्यामजी
मेले की भीड़ को ध्यान में रखते हुए सफाई व्यवस्था पर काफी फोकस किया गया। अलग-अलग स्थानों पर विशेष दल तैनात कर चौबीस घंटे सफाई अभियान चलाया गया। पेयजल की निर्बाध आपूर्ति और रात्रि में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था ने श्रद्धालुओं की सुविधा को और सुदृढ़ बनाया।
ओमप्रकाश, अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका खाटूश्यामजी
मेले के दौरान कानून-व्यवस्था के साथ-साथ यातायात प्रबंधन की कमान बेहद संतुलित और प्रभावी ढंग से संभाली। ई-रिक्शा संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए उन्होंने किराया निर्धारण से लेकर कलर पास प्रणाली लागू कर अलग-अलग क्षेत्रों में संचालन किया।
राव आनंद कुमार, डीवाईएसपी, खाटूश्यामजी
आठ दिवसीय फाल्गुनी मेले में इस बार करीब 19 लाख भक्तों ने सुगमता से दर्शन किए। कमेटी, प्रशासन और पुलिस के बेहतर समन्वय के चलते भक्तों को बिना किसी असुविधा के कम समय में दर्शन संभव हो पाए।
मानवेंद्र सिंह चौहान, मंत्री, श्री श्याम मंदिर कमेटी, खाटूश्यामजी