सरकार ने राज्य कर्मचारियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति में संशोधन किया गया।
रविन्द्र सिंह राठौड़, सीकर.
सरकार ने राज्य कर्मचारियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति में संशोधन किया गया। अनुकंपा नियुक्ति नियम 1996 में संशोधन कर ग्रेड-पे को 2800 से बढ़ाकर 3600 किया है। जबकि मृत रक्षा कार्मिक नियुक्ति नियम में इसे लागू नहीं किया गया है। संशोधन के बाद कर्मचारियों के आश्रितों को अब योग्यता के अनुसार 3600 ग्रेड-पे में नौकरी मिलेगी। लेकिन मृत रक्षा कार्मिकों के आश्रितों को अब 2800 ग्रेड पे पर ही क्लर्क की नौकरी करनी पड़ेगी।
करगिल पैकेज के अनुसार मिले नौकरी
शहीद-शहीद होता है, चाहे वह किसी भी सन, युद्ध या ऑपरेशन में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुआ हो। लेकिन राज्य सरकार ने शहीद सैनिकों को नियमों के तहत तीन कैटेगरी में बांट दिया। पहला नियम 2002 में लेवल 1 से 11 के तहत करगील पैकेज में शहीद आश्रितों को नायब तहसीलदार रैंक तक की नौकरी मिली। लेकिन उसके बाद नियम 2008 एवं 2018 में लेवल 1 से 9 तक कर दिया गया। इसके बाद से शहीदों आश्रितों को केवल क्लर्क के पद पर ही लगाया जा रहा हैं। लेवल बदलने के चलते बीएड व एसटीसी धारी शहीद आश्रितों को भी क्लर्क के पद पर लगाया जा रहा हैं। इस तरह से लेवल व ग्रेड पे के नाम पर शहीद परिवारों के आश्रितों के साथ राज्य सरकार लगातार भेदभाव कर रही हैं।
3600 ग्रेड पे की मांग
प्रदेश में 428 शहीद परिवारों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति मिलनी हैं। इनमें से एक परिवार के आश्रित को इस नियम से पहले अनुकंपा नौकरी मिल चुकी हैं। लेकिन शेष 427 शहीद परिवार अब नियुक्ति में 3600 ग्रेड पे की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दें को लेकर शहीद वेलफेयर संस्था के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि संस्था ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम ज्ञापन भी दिया हैं। सरकार की इस भेदभाव पूर्ण नीति से सैनिक व शहीद परिवारों में आक्रोश हैं।
अनुकंपा से वंचित सैंकड़ों शहीद परिवार
सन 1971 के युद्ध में राजस्थान के करीब 500 से अधिक सैनिक शहीद हुए। लेकिन इनमें 65 के करीब शहीद आश्रितों को ही सरकारी नौकरी मिली। युद्ध में शहीद हुए अधिकांश सैनिक अविवाहित या फिर उनके बच्चे नहीं थे। ऐसे में माता-पिता या उनकी पत्नी को नौकरी देने का प्रावधान था, लेकिन उस समय शिक्षा का स्तर बहुत कमजोर होने के चलते नौकरी नहीं मिल पाई। 1991 से 1999 के बीच राजस्थान के करीब 650 सैनिक शहीद हुए। इनमें से करीब 180 शहीद आश्रितों को अनुकंपा नौकरी मिली हैं। पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 1947 से 31 मार्च 1970 के शहीदों को ब्लड रिलेशन के आधार पर मिलने वाली अनुकंपा नौकरी की अधिसूचना भी जारी हो गई। इसमें प्रदेश के एक शहीद आश्रित को नौकरी भी मिल गई।
मंत्री ने ली बैठक
शहीद परिवारों की विभिन्न मांगों को लेकर सैनिक कल्याण मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने शासन सचिवालय के कांफ्रेस कक्ष में बैठक ली। बैठक अब तक शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों को भूमि आवंटन, अनुकंपात्मक नियुक्ति, विद्यालय नामकरण, शहीद स्मारकों व गैलेंट्री अवार्ड धारकों को भूमि आवंटन एवं सैनिक कल्याण से संबंधित अन्य मामलों के निस्तारण के संबंध में रखी गई। वर्ष 1971 से 1999 के शहीदों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए विभिन्न संस्थाएं लंबे समय से मांग उठा रही हैं।