Motivational Story: यदि मन में कुछ करने का जुनून हो तो तमाम अभावों को मात देकर इतिहास रचा जा सकता है। कुछ ऐसी ही संघर्षभरी कहानी है सीकर के रायपुर गांव की बेटी अर्चना बिलोनियां की।
सीकर। यदि मन में कुछ करने का जुनून हो तो तमाम अभावों को मात देकर इतिहास रचा जा सकता है। कुछ ऐसी ही संघर्षभरी कहानी है सीकर के रायपुर गांव की बेटी अर्चना बिलोनियां की। होनहार अर्चना ने कजाकिस्तान में आयोजित 11वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड इनक्लाइन बैंच प्रेस कॉम्पीटिशन में दो मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया है। अर्चना ने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए 80 प्लस किलो भार वर्ग में सीनियर महिला वर्ग के स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में 292.5 किलो वजन उठाकर गोल्ड मेडल और बैंच प्रेस में 107.5 किलो वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता है।
आर्थिक रूप से कमजोर अर्चना के पास अभ्यास के लिए पावर लिफ्टिंग के संसाधन जुटाने के पैसे तक नहीं थे, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वह अपने लक्ष्य के लिए जुटी रही। अर्चना के जज्बे को देखकर भामाशाहों ने सहयोग की पहल शुरू की। भामाशाहों ने बेटी को नियमित अभ्यास के लिए सामान जुटाया, जिसके बलबूते वह पदक जीत चुकी है।
अर्चना के पिता बंशीलाल बिलोनियां पत्थर की खदानों में मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। अर्चना के मकान भी कच्चे हैं। अर्चना चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उसने पहले सीकर में कोच दुर्जनसिंह शेखावत की अगुवाई में अभ्यास किया। उन्होंने लगातार तैयारी करवाने के साथ ही आर्थिक सहयोग भी दिलवाया। बाद में जयपुर में कोच उदयभान सिंह रावत के मार्गदर्शन में तैयारी कर यह मुकाम हासिल किया।
अर्चना अब तक राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत चुकी हैं। नेशनल व स्टेट लेवल पर गोल्ड जीत चुकी अर्चना फिलहाल राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमकॉम कर रही हैं। 2017 से पावर लिफ्टिंग में अर्चना ने दो अंतराष्ट्रीय मेडल्स के साथ ही राज्य स्तरीय स्पर्धा में वेट लिफ्टिंग में एक गोल्ड, चार सिल्वर व दो कांस्य सहित कुल नौ पदक जीते हैं। वहीं पावर लिफ्टिंग में एक गोल्ड मेडल, चार सिल्वर व पांच ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। वहीं स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में चार गोल्ड मेडल और स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में ही नेशनल में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं।